02-02-2024 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन


मीठे बच्चे - ऊंच पद पाने के लिए बाप तुम्हें जो पढ़ाते हैं उसे ज्यों का त्यों धारण करो, सदा श्रीमत पर चलते रहो''

प्रश्नः-
कभी भी अफसोस न हो, उसके लिए किस बात पर अच्छी तरह विचार करो?

उत्तर:-
हर एक आत्मा जो पार्ट बजा रही है, वह ड्रामा में एक्यूरेट नूँधा हुआ है। यह अनादि और अविनाशी ड्रामा है। इस बात पर विचार करो तो कभी भी अफसोस नहीं हो सकता। अफसोस उन्हें होता जो ड्रामा के आदि मध्य अन्त को रियलाइज नहीं करते हैं। तुम बच्चों को इस ड्रामा को ज्यों का त्यों साक्षी होकर देखना है, इसमें रोने रूसने की कोई बात नहीं।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) विचार सागर मंथन कर स्वयं को ज्ञान रत्नों से भरपूर करना है। ड्रामा के राज़ को अच्छी रीति समझकर दूसरों को समझाना है। किसी भी बात में अफसोस न कर सदा हर्षित रहना है।

2) अपनी अवस्था बहुतकाल से एकरस बनानी है ताकि पिछाड़ी में एक बाप के सिवाए दूसरा कोई भी याद न आये। अभ्यास करना है हम भाई भाई हैं, अभी वापस जाते हैं।

वरदान:-
अलबेलेपन की लहर को विदाई दे सदा उमंग-उत्साह में रहने वाली समझदार आत्मा भव

कई बच्चे दूसरों को देखकर स्वयं अलबेले हो जाते हैं। सोचते हैं ये तो होता ही है....चलता ही है... क्या एक ने ठोकर खाई तो उसे देखकर अलबेलेपन में आकर खुद भी ठोकर खाना - यह समझदारी है? बापदादा को रहम आता है कि ऐसे अलबेले रहने वालों के लिए पश्चाताप की घड़ियाँ कितनी कठिन होंगी, इसलिए समझदार बन अलबेलेपन की लहर को, दूसरों को देखने की लहर को मन से विदाई दो। औरों को नहीं देखो, बाप को देखो।

स्लोगन:-
वारिस क्वालिटी तैयार करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा।