04-02-2024     प्रात:मुरली  ओम् शान्ति 31.01.98 "बापदादा"    मधुबन


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वरदान:-
सम्बन्ध-सम्पर्क में सन्तुष्टता की विशेषता द्वारा माला में पिरोने वाले सन्तुष्टमणी भव

संगमयुग सन्तुष्टता का युग है। जो स्वयं से भी सन्तुष्ट हैं और सम्बन्ध-सम्पर्क में भी सदा सन्तुष्ट रहते वा सन्तुष्ट करते हैं वही माला में पिरोते हैं क्योंकि माला सम्बन्ध से बनती है। अगर दाने का दाने से सम्पर्क नहीं हो तो माला नहीं बनेंगी इसलिए सन्तुष्टमणी बन सदा सन्तुष्ट रहो और सर्व को सन्तुष्ट करो। परिवार का अर्थ ही है सन्तुष्ट रहना और सन्तुष्ट करना। कोई भी प्रकार की खिटखिट न हो।

स्लोगन:-
विघ्नों का काम है आना और आपका काम है विघ्न-विनाशक बनना।