05-02-2024 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन


मीठे बच्चे - यह पढ़ाई है दी बेस्ट', इसे ही सोर्स ऑफ इनकम कहते हैं, पढ़ाई में पास होना है तो टीचर की मत पर चलते चलो''

प्रश्नः-
बाप ड्रामा का राज़ जानते भी अपने बच्चों से कौन-सा पुरुषार्थ कराते हैं?

उत्तर:-
बाबा जानते हैं नम्बरवार ही सब बच्चे सतोप्रधान बनेंगे लेकिन बच्चों से सदा यही पुरुषार्थ कराते कि बच्चे ऐसा पुरुषार्थ करो जो सजायें न खानी पड़े। सजाओं से छूटने के लिए जितना हो सके प्यार से बाप को याद करो। चलते-फिरते, उठते-बैठते याद में रहो तो बहुत खुशी रहेगी। आत्मा तमोप्रधान से सतोप्रधान बन जायेगी।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) स्वयं भगवान् हमारे पर मेहरवान हुआ है, वह हमें पढ़ा रहे हैं, इस नशे में रहना है। पढ़ाई सोर्स ऑफ इनकम है इसलिए मिस नहीं करना है।

2) अथाह खुशी का अनुभव करना और कराना है। चलते-फिरते देही-अभिमानी बन बाप की याद में रह आत्मा को सतोप्रधान जरूर बनाना है।

वरदान:-
समय प्रमाण हर शक्ति का अनुभव प्रैक्टिकल स्वरूप में करने वाले मास्टर सर्वशक्तिमान भव

मास्टर का अर्थ है कि जिस शक्ति का जिस समय आह्वान करो वो शक्ति उसी समय प्रैक्टिकल स्वरूप में अनुभव हो। आर्डर किया और हाज़िर। ऐसे नहीं कि आर्डर करो सहनशक्ति को और आये सामना करने की शक्ति, तो उसको मास्टर नहीं कहेंगे। तो ट्रायल करो कि जिस समय जो शक्ति आवश्यक है उस समय वही शक्ति कार्य में आती है? एक सेकण्ड का भी फर्क पड़ा तो जीत के बजाए हार हो जायेगी।

स्लोगन:-
बुद्धि में जितना ईश्वरीय नशा हो, कर्म में उतनी ही नम्रता हो।