06-02-2024 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन


मीठे बच्चे - अपने हार और जीत की हिस्ट्री को याद करो, यह सुख और दु:ख का खेल है, इसमें 3/4 सुख है, 1/4 दु:ख है, इक्वल नहीं''

प्रश्नः-
यह बेहद का ड्रामा बहुत ही वन्डरफुल है - कैसे?

उत्तर:-
यह बेहद का ड्रामा इतना तो वन्डरफुल है जो हर सेकण्ड सारी सृष्टि में हो रहा है, वह फिर से हूबहू रिपीट होगा। यह ड्रामा जूँ मिसल चलता ही रहता है, टिक-टिक होती रहती है। एक टिक न मिले दूसरी टिक से, इसलिए यह बड़ा वन्डरफुल ड्रामा है। जो भी मनुष्य का पार्ट अच्छा वा बुरा चलता है सब नूँध है। इस बात को भी तुम बच्चे ही समझते हो।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) बाप समान प्यार का सागर बनना है। दु:ख का सागर नहीं। बाप की निंदा कराने वाला कोई भी कर्म नहीं करना है। बहुत मीठा प्यारा बनना है।

2) योगबल से पवित्र बनकर फिर दूसरों को भी बनाना है। कांटों के जंगल को फूलों का बगीचा बनाने की सेवा करनी है। सदा खुशी में रहना है कि हमारा मीठा बाबा बाप भी है तो टीचर भी है। उन जैसा मीठा कोई नहीं।

वरदान:-
परमात्म दुलार को प्राप्त करने वाले अब के सो भविष्य के राज दुलारे भव

संगमयुग पर आप भाग्यवान बच्चे ही दिलाराम के दुलार के पात्र हो। यह परमात्म दुलार कोटों में कोई आत्माओं को ही प्राप्त होता है। इस दिव्य दुलार द्वारा राज दुलारे बन जाते हो। राजदुलारे अर्थात् अब भी राजे और भविष्य के भी राजे। भविष्य से भी पहले अब स्वराज्य अधिकारी बन गये। जैसे भविष्य राज्य की महिमा है एक राज्य, एक धर्म..ऐसे अभी सर्व कर्मेन्द्रियों पर आत्मा का एक छत्र राज्य है।

स्लोगन:-
अपनी सूरत से बाप की सीरत दिखाने वाले ही परमात्म स्नेही हैं।