08-02-2024 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन


मीठे बच्चे - सदा याद रखो कि हम ब्राह्मण चोटी हैं, पुरूषोत्तम बन रहे हैं तो हर्षित रहेंगे, अपने आप से बातें करना सीखो तो अपार खुशी रहेगी''

प्रश्नः-
बाप की शरण में कौन आ सकते हैं? बाप शरण किसको देते हैं?

उत्तर:-
बाप की शरण में वही आ सकते हैं जो पूरा-पूरा नष्टोमोहा हो। जिनका बुद्धियोग सब तऱफ से टूटा हुआ हो। मित्र सम्बन्धियों आदि में बुद्धि की लागत न हो। बुद्धि में रहे मेरा तो एक बाबा दूसरा न कोई। ऐसे बच्चे ही सर्विस कर सकते हैं। बाप भी ऐसे बच्चों को ही शरण देते हैं।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) सदा हर्षित रहने के लिए रूहानी सर्विस करनी है, सच्ची कमाई करनी और करानी है। अपना और दूसरों का कल्याण करना है। ट्रेन में भी बैज पर सर्विस करनी है।

2) पुरानी दुनिया से दिल हटा लेनी है। नष्टोमोहा बनना है, एक बाप से सच्ची प्रीत रखनी है।

वरदान:-
संगमयुग के महत्व को जान हर समय विशेष अटेन्शन रखने वाले हीरो पार्टधारी भव

हर कर्म करते हुए सदा यही वरदान स्मृति में रहे कि मैं हीरो पार्टधारी हूँ तो हर कर्म विशेष होगा, हर सेकेण्ड, हर समय, हर संकल्प श्रेष्ठ होगा। ऐसे नहीं कह सकते कि यह तो सिर्फ 5 मिनट साधारण हुआ। संगमयुग के 5 मिनट भी बहुत महत्व वाले हैं। 5 मिनट 5 साल से भी ज्यादा हैं इसलिए हर समय इतना अटेन्शन रहे। सदा का राज्यभाग्य प्राप्त करना है तो अटेन्शन भी सदाकाल का हो।

स्लोगन:-
जिनके संकल्प में दृढ़ता की शक्ति है, उनके लिए हर कार्य सम्भव है।