09-02-2024 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन


मीठे बच्चे - शिव जयन्ती पर तुम खूब धूमधाम से निराकार बाप की बायोग्राफी सबको सुनाओ, यह शिव जयन्ती ही हीरे तुल्य है''

प्रश्नः-
तुम ब्राह्मणों की सच्ची दीवाली कब है और कैसे?

उत्तर:-
वास्तव में शिव जयन्ती ही तुम्हारे लिए सच्ची-सच्ची दीवाली है क्योंकि शिवबाबा आकर तुम आत्मा रूपी दीपक को जगाते हैं। हरेक के घर का दीप जलता है अर्थात् आत्मा की ज्योति जगती है। वह स्थूल दीपक जलाते लेकिन तुम्हारा सच्चा दीपक शिव बाप के आने से जगता है इसलिए तुम खूब धूमधाम से शिव जयन्ती मनाओ।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) शिवजयन्ती धूमधाम से मनाओ। शिवबाबा के मन्दिर में शिव की और लक्ष्मी-नारायण के मन्दिर में लक्ष्मी-नारायण वा राधे-कृष्ण की बायोग्राफी सुनाओ। सबको युक्तियुक्त समझानी दो।

2) अज्ञान अन्धियारे से बचने के लिए आत्मा रूपी दीपक को ज्ञान घृत से सदा प्रज्जवलित रखना है। दूसरों को भी अज्ञान अन्धियारे से निकालना है।

वरदान:-
सर्व खजानों से सम्पन्न बन निरन्तर सेवा करने वाले अखुट, अखण्ड महादानी भव

बापदादा ने संगमयुग पर सभी बच्चों को अटल-अखण्ड'' का वरदान दिया है। जो इस वरदान को जीवन में धारण कर अखण्ड महादानी अर्थात् निरन्तर सहज सेवाधारी बनते हैं वह नम्बरवन बन जाते हैं। द्वापर से भक्त आत्मायें भी दानी बनती हैं लेकिन अखुट खजानों के दानी नहीं बन सकती। विनाशी खजाने या वस्तु के दानी बनते हैं, लेकिन आप दाता के बच्चे जो सर्व खजानों से सम्पन्न हो वह एक सेकण्ड भी दान देने के बिना रह नहीं सकते।

स्लोगन:-
अन्दर की सच्चाई सफाई प्रत्यक्ष तब होती है जब स्वभाव में सरलता हो।