10-02-2024 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन


मीठे बच्चे - आत्म-अभिमानी बनने का अभ्यास करो तो दैवीगुण आते जायेंगे, क्रिमिनल ख्यालात समाप्त हो जायेंगे, अपार खुशी रहेगी''

प्रश्नः-
अपनी चलन को सुधारने वा अपार खुशी में रहने के लिए कौन-सी बात सदा स्मृति में रखनी है?

उत्तर:-
सदा स्मृति रहे कि हम दैवी स्वराज्य स्थापन कर रहे हैं, हम मृत्युलोक को छोड़ अमरलोक में जा रहे हैं - इससे बहुत खुशी रहेगी, चलन भी सुधरती जायेगी क्योंकि अमरलोक नई दुनिया में जाने के लिए दैवीगुण जरूर चाहिए। स्वराज्य के लिए बहुतों का कल्याण भी करना पड़े, सबको रास्ता बताना पड़े।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) बहुतों का कल्याण करने के लिए अपनी जबान बहुत मीठी बनानी है। मीठी जबान से सर्विस करनी है। सहनशील बनना है।

2) कर्मो की गहन गति को समझ विकारों पर जीत पानी है। जगतजीत देवता बनना है। आत्म-अभिमानी बन क्रिमिनल दृष्टि को सिविल बनाना है।

वरदान:-
श्रेष्ठ कर्म द्वारा दिव्य गुण रूपी प्रभू प्रसाद बांटने वाले फरिश्ता सो देवता भव

वर्तमान समय चाहे अज्ञानी आत्मायें हैं, चाहे ब्राह्मण आत्मायें हैं, दोनों को आवश्यकता गुणदान की है। तो अब इस विधि को स्वयं में वा ब्राह्मण परिवार में तीव्र बनाओ। ये दिव्य गुण सबसे श्रेष्ठ प्रभू प्रसाद है, इस प्रसाद को खूब बांटो, जैसे स्नेह की निशानी एक दो को टोली खिलाते हो ऐसे दिव्य गुणों की टोली खिलाओ तो इस विधि से फरिश्ता सो देवता बनने का लक्ष्य सहज सबमें प्रत्यक्ष दिखाई देगा।

स्लोगन:-
योग रूपी कवच को पहनकर रखो तो माया रूपी दुश्मन वार नहीं कर सकता।