13-02-2024 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन


मीठे बच्चे - विदेही बन बाप को याद करो, स्वधर्म में टिको तो त़ाकत मिलेगी, खुशी और तन्दुरूस्ती रहेगी, बैटरी फुल होती जायेगी''

प्रश्नः-
ड्रामा की किस नूँध को जानने के कारण तुम बच्चे सदा अचल रहते हो?

उत्तर:-
तुम जानते हो यह बाम्ब्स आदि जो बने हैं, यह छूटने हैं जरूर। विनाश होगा तब तो हमारी नई दुनिया आयेगी। यह ड्रामा की अनादि नूँध है, मरना तो सबको है। तुम्हें खुशी है कि हम यह पुराना शरीर छोड़ राजाई में जन्म लेंगे। तुम ड्रामा को साक्षी हो देखते हो, इसमें हिलने की बात नहीं, रोने की कोई दरकार नहीं।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) ज्ञान-योग की मस्ती में रहना है, दिल स़ाफ रखनी है। झरमुई-झगमुई (व्यर्थ चिंतन) में अपना समय नहीं गँवाना है।

2) हम आत्मा भाई-भाई हैं, अब वापिस घर जाना है - यह अभ्यास पक्का करना है। विदेही बन स्वधर्म में स्थित हो बाप को याद करना है।

वरदान:-
स्व स्वरूप और बाप के सत्य स्वरूप को पहचान सत्यता की शक्ति धारण करने वाले दिव्यता सम्पन्न भव

जो बच्चे अपने स्व स्वरूप को वा बाप के सत्य परिचय को यथार्थ जान लेते हैं और उसी स्वरूप की स्मृति में रहते हैं तो उनमें सत्यता की शक्ति आ जाती है। उनके हर संकल्प सदा सत्यता वा दिव्यता सम्पन्न होते हैं। संकल्प, बोल, कर्म और सम्बन्ध-सम्पर्क सबमें दिव्यता की अनुभूति होती है। सत्यता को सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं रहती। अगर सत्यता की शक्ति है तो खुशी में नाचते रहेंगे।

स्लोगन:-
सकाश देने की सेवा करो तो समस्यायें सहज ही भाग जायेंगी।