04-10-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति 31.12.2011 "बापदादा" मधुबन
नये वर्ष में तीव्र
पुरुषार्थी भव के वरदान द्वारा अपने चेहरे से फरिश्ता रूप दिखाओ, लाइट माइट स्वरूप
ज्वालामुखी योग से व्यर्थ को जलाओ, दु:खी अशान्त आत्माओं को शक्तियों का दान दो
आज ब्राह्मण परिवार
के रचता अपने चारों ओर के परिवार को देख रहे हैं। है छोटा सा परिवार, छोटा सा संसार
है लेकिन बहुत प्यारा है क्योंकि कोटों में से कोई है। क्यों प्यारे हैं? क्योंकि
बाप को पहचाना है। बाप से वर्से के अधिकारी बने हैं। तो जैसे बाप प्यारे हैं वैसे
यह ब्राह्मण परिवार भी प्यारा है। बापदादा ने जन्मते ही हर बच्चे के मस्तक में
भाग्य के सितारे को चमकाया है इसलिए यह छोटा सा संसार अति प्यारा है। आप सभी भी अपना
इतना स्वमान जानते हो ना! बापदादा भी एक-एक बच्चे को देख खुश होते हैं और क्या गीत
गाते हैं? वाह बच्चे वाह!
आज तो सभी इस श्रेष्ठ
दिन पर बाप से मिलने आये हैं। आज का दिन है संगम का दिन। विदाई भी है और बधाई भी
है। वैसे भी संगम का महत्व है। जहाँ भी सागर और नदी का संगम होता है उसका बहुत
महत्व होता है। तो आज के दिन का भी महत्व बहुत गायन योग्य है। पुराना वर्ष समाप्त
और नया वर्ष आरम्भ होना है। आज के दिन सभी के दिल में आगे आने वाले वर्ष के लिए
कितना उमंग है! हर एक ने अपने-अपने दिल में प्लैन बनाया है - क्या छोड़ना है और क्या
बनना है! दोनों ही प्लैन बनाया है? बनाया है? जिसने आने वाले वर्ष के लिए अपने आगे
बढ़ने का, तीव्र पुरुषार्थ का प्लैन बनाया है, वह हाथ उठाना। बनाया है! मुबारक हो,
क्योंकि सब जानते हैं कि बापदादा हर बच्चे के लिए क्या चाहता है। बापदादा हर बच्चे
के लिए यही शुभ भावना रखते हैं कि हर बच्चा बाप समान सम्पन्न और सम्पूर्ण बन जाये।
अब तो समय भी साथ दे रहा है। तो हर एक ने अपने मन में अपने प्रति नया प्लैन बनाया
है ना! कुछ छोड़ना है और कुछ आगे बढ़ना है। तो छोड़ना क्या है? बापदादा ने देखा कि
पुराने संसार और सम्बन्ध में छोड़ने में सबका पुरुषार्थ पर अटेन्शन भी है। एक बात
जो छोड़ने भी चाहते हैं लेकिन अब तक बापदादा ने देखा कि पुराने संस्कार उसको छोड़ने
में थोड़ी मेहनत लगती है। तो बापदादा यही चाहते हैं कि इस नये वर्ष में हर एक बच्चा
अपने निज़ी संस्कार का संस्कार कर ले। आप सब भी इसी संकल्प को पूरा करने चाहते हैं
ना! क्योंकि पुराना संस्कार जिसको आप लोग कहते हो मेरी नेचर है, भाव नहीं है लेकिन
नेचर है। तो नेचर इस जन्म के ब्राह्मण की नहीं है लेकिन पुरानी है। तो उस पुराने
संस्कार वा नेचर को आज के दिन छोड़ने का संकल्प कर सकते हैं? हर एक अपने को तो जानते
हैं, तो आज वर्ष की विदाई के साथ-साथ उस पुराने संस्कार को छोड़ने का दृढ़ संकल्प
कर सकते हो? कर सकते हो? चाहते भी हैं, ऐसा नहीं है कि चाहते नहीं हैं लेकिन फिर भी
बार-बार पुरुषार्थ में तीव्रता लाने में वही संस्कार भिन्न-भिन्न रूप से विघ्न डालते
हैं। तो बापदादा यही चाहते हैं कि वर्ष को विदाई देने के साथ आज के दिन उसको भी
विदाई दे दो। इसके लिए तैयार हैं? जो तैयार हैं वह हाथ उठाओ। इसके लिए क्या करेंगे?
अपने लिए कोई प्लैन भी सोचा है? इसके लिए सबसे अच्छी बात है दृढ़ संकल्प। संकल्प
है, होना चाहिए लेकिन संकल्प में तीव्रता चाहिए। जैसे ब्राह्मण बनने के साथ-साथ यह
प्रतिज्ञा की कि कोई भी अशुद्ध भोजन स्वीकार नहीं करना है। तो बापदादा ने देखा इसमें
दृढ़ संकल्प द्वारा मैजारिटी पास हैं। जैसे तन के लिए अशुद्ध भोजन का संकल्प किया
और प्रैक्टिकल कर रहे हो, ऐसे ही मन के लिए यह दृढ़ संकल्प करना है कि कभी भी किसी
के प्रति भी, किसी भी सरकमस्टांश प्रमाण कोई भी व्यर्थ संकल्प न कर सदा हर आत्मा के
प्रति शुभ भावना, शुभ कामना रखनी ही है। मन का भोजन है संकल्प, तो जैसे तन के लिए
दृढ़ संकल्प मैजारिटी ने किया है, ऐसे ही क्या मन के लिए व्यर्थ संकल्प, अशुद्ध
भावना मिटा नहीं सकते? हर आत्मा के प्रति दिल का स्नेह और सहयोग अपने मन में नहीं
रख सकते हैं?
तो आज बापदादा इस
पुराने वर्ष के साथ इस वृत्ति वा दृष्टि को हर बच्चे से विदाई चाहते हैं। यह दृढ़
संकल्प कर सकते हो? कर सकते हैं? बोलो, मातायें, टीचर्स, सब भाई भी चाहते हैं ना।
हाँ हाथ उठाओ। कल से किसी भी आत्मा के प्रति अगर कोई भी व्यर्थ है, व्यर्थ भावना वा
व्यर्थ भाव, उसका आज समाप्ति समारोह मनाने चाहते हैं। बोलो, टीचर्स सब तैयार हैं?
टीचर दो दो हाथ उठाओ। उठाओ। अच्छा। जिन्होंने नहीं उठाया, वह उठाओ। जिन्होंने नहीं
उठाया वह थोड़ा सा उठके खड़े हो जाओ। अच्छा हैं! जो पुरुषार्थ करेंगे लेकिन दृढ़
संकल्प नहीं करेंगे, ऐसे हैं? जो उठे हैं वह लक्ष्य और पुरुषार्थ करेंगे तो हाथ
उठाओ क्योंकि समय का अटेन्शन रख यह सोचो कि सभी को इस संगम समय में भविष्य बहुत समय
की सफलता प्राप्त करनी है। 21 जन्म का वर्सा लेना है। तो कहाँ यह एक जन्म और कहाँ
21 जन्म! तो इस एक जन्म में भी काफी समय अपना पुरुषार्थ तीव्र करना पड़े तभी बहुत
समय की जो प्राप्ति करनी है, वह कर सकेंगे। बाप से प्यार है ना तो साथ रहना है ना!
नजदीक रहना है ना! ब्रह्मा बाप के साथी बनके राज्य अधिकारी बनना है ना! तो अब भी
इतना समय बाप समान तो बनना पड़े। ब्रह्मा बाप का एक-एक बच्चे से कितना प्यार है, वह
तो जानते ही हो। हर एक कहता है - बाबा का जितना मेरे से प्यार है उतना किससे नहीं
है, मेरे से प्यार है। तो यह प्यार, बाप दादा दोनों का प्यार इस जन्म में ही अनुभव
कर रहे हो। और जिससे प्यार होता है उसकी बात कभी भी टाली नहीं जाती है। तो ब्रह्मा
बाप से सबका प्यार है, कितना प्यार है? बहुत प्यार है। चाहे दिखा नहीं सकते हैं
लेकिन बाप जानते हैं कि प्यार सभी बच्चों का है, नम्बरवार है लेकिन प्यार है, इसमें
बापदादा भी सभी बच्चों को सर्टिफिकेट देते हैं कि प्यार है। प्यार तो है लेकिन बाप
ने देखा कि कभी-कभी नटखट हो जाते हैं, तो बाप उस समय क्या करता? बाप देख-देख विशेष
शक्ति देता रहता क्योंकि बाप यही चाहते हैं कि हर बच्चा राजा बच्चा है, दुनिया में
जो लाडला बच्चा होता है उसको राजा बच्चा कहते हैं। होता राजा नहीं लेकिन कहते हैं
राजा बच्चा, लेकिन आप सभी बापदादा के अब भी राजा बच्चा हो और भविष्य में भी राजा
बच्चा हो। अभी स्वमान है, स्वराज्य है। अभी आत्मा का राज्य सर्व कर्मेन्द्रियों के
ऊपर है। तो स्वराज्यधारी अभी हो और विश्व राज्यधारी भविष्य में हो। तो राजा बच्चे
हो ना! हैं तो कांध हिलाओ।
तो बापदादा आज
अमृतवेले चारों ओर, चाहे विदेश चाहे देश, चारों ओर चक्र लगाने गये। तो क्या देखा?
योग में अमृतवेले बैठते मैजारिटी हैं लेकिन स्नेह में बैठते हैं, बापदादा से बातें
भी करते हैं, आत्मिक स्मृति में भी बैठते, बाप-दादा से शक्ति भी लेते हैं लेकिन अभी
बापदादा आने वाले नये वर्ष में नवीनता चाहते हैं क्योंकि अभी समय दिन प्रतिदिन
नाज़ुक आना ही है। तो ऐसे समय पर अभी ज्वालामुखी योग चाहिए। वह ज्वालामुखी योग की
आवश्यकता अभी आवश्यक है। ज्वालामुखी योग अर्थात् लाइट माइट स्वरूप शक्तिशाली,
क्योंकि समय प्रमाण अभी दु:ख, अशान्ति, हलचल बढ़नी ही है इसलिए अपने दु:खी, परेशान
आत्माओं को विशेष ज्वालामुखी योग द्वारा शक्तियां देने की आवश्यकता पड़ेगी। दु:ख
अशान्ति के रिटर्न में कुछ न कुछ शक्ति, शान्ति अपने मन्सा सेवा द्वारा देनी पड़ेगी।
जो आपने इस समय की टॉपिक रखी है एक परिवार, उसके प्रमाण जब एक परिवार है, तो अशान्त
आत्माओं को कुछ तो अंचली देंगे इसीलिए बापदादा अगला वर्ष जो आया कि आया उसके लिए
विशेष अटेन्शन खिंचवा रहे हैं कि अभी ज्वालामुखी योग की आवश्यकता है। ज्वालामुखी
योग द्वारा ही जो भी संस्कार रहे हुए हैं वह भी भस्म होने हैं।
अभी आपकी एडवांस
पार्टी के साथी आप सबसे यह चाहते हैं कि अभी समाप्ति के समय को सामने लाओ। अब
रिटर्न जरनी याद रखो। आपकी दीदी याद दिला रही है कि मुझे सदा यह याद रहता था “अब घर
जाना है'', अब घर जाना है। आपकी दादी यही याद दिला रही है कि जैसे मुझे याद रहा अभी
सम्पन्न बनना है, सम्पूर्ण बनना है, धुन लगी रही। तो आज विशेष अमृतवेले वतन में
बापदादा से मिलन मनाते कह रहे थे कि अभी हमारे तरफ से, जो भी दादियां गई हैं सब
मिलके कह रही थी अब ज्वालामुखी योग की बहुत आवश्यकता है, चाहे औरों को शक्ति देने
के लिए, चाहे अपने ब्राह्मण परिवार को सम्पन्न बनाने के लिए। अभी समय को समीप लाने
वाले आप निमित्त हो इसलिए आने वाले वर्ष में क्या करेंगे? विशेष क्या करेंगे? एक दो
के स्नेही सहयोगी बन हर एक सेन्टर, सेवास्थान ज्वालामुखी योग का वायब्रेशन और कर्म
में एक दो के स्नेही सहयोगी बन, हर एक के प्रति अटेन्शन रखते जो भी कमी है उसमें
सहयोग दो। मन्सा द्वारा अन्य आत्माओं की सेवा करो और अपने सहयोग द्वारा ब्राह्मण
साथियों की विशेष सेवा करो, तभी हम लोगों की दिल की आश पूरी होगी।
तो आज वतन में एडवांस
पार्टी अगले साल के लिए आप सबको याद भी दे रही थी और अपने दिल की आशायें भी बता रही
थी। तो बोलो, बापदादा का संकल्प तो सुना ही लेकिन साथ में अपने दादियों की भी अगले
वर्ष के लिए शुभ भावनायें भी सुनी ना! बापदादा तो सभी बच्चों को चाहे कोई कमजोर है,
चाहे तीव्र पुरुषार्थी है सबको तीन मुबारक दे रहे हैं - एक नव जीवन की मुबारक, दूसरी
नव वर्ष की मुबारक और तीसरी नव दुनिया में साथी बन चलने की मुबारक।
बापदादा ने यह भी कहा
कि सभी अपने अन्दर अपने लिए समय निश्चित करो कि कब तक अपने को बाप समान बनायेंगे।
अपने अन्दर अपने लिए निश्चित करो। तो निश्चित करना आता है ना? बापदादा तो आज हर
बच्चे को देख यही वरदान दे रहे हैं अगले वर्ष में हर बच्चा तीव्र पुरुषार्थी भव।
अमृतवेले जब याद में बैठते हो और जब उठने का समय होता है उस समय बापदादा का यह
वरदान अपने दिल में याद रखना तीव्र पुरुषार्थी भव। जैसे बापदादा ने दो बातें पहले
ही अटेन्शन में दिलाई हैं क्योंकि संगम का समय अचानक समाप्त होना है। तो एक समय,
दूसरा संकल्प, दोनों पर हर घड़ी अटेन्शन। बापदादा की यह भी हर बच्चे के प्रति शुभ
भावना है कि हर बच्चा इस वर्ष में क्या बनें? क्या बनेंगे? जो भी आपके चेहरे में
देखे आपके चेहरे से फरिश्ता रूप दिखाई दे। फलानी हूँ, फलाना हूँ नहीं। फरिश्ता
अनुभव में आवे, इसके लिए ज्वालामुखी योग, कोई व्यर्थ नहीं। लाइट और माइट स्वरूप योग
से व्यर्थ को जलाओ। समर्थ फरिश्ता नज़र आये, जिसको भी देखें, क्योंकि बाप के सिकीलधे
बच्चे तो हो। बाप ने आपको खास कहाँ-कहाँ से चुन करके अपना बनाया है। तो लक्ष्य रखो
मैं ब्राह्मण सो फरिश्ता हूँ। तो अमृतवेले अपनी दिनचर्या में यह याद रखना मैं
ब्राह्मण सो फरिश्ता हूँ। चलते फिरते फरिश्ता रूप, फरिश्ता स्वरूप तो अच्छा लगता है
ना! ब्रह्मा बाप फरिश्ता बना, फालो फादर।
तो इस वर्ष का वरदान
जो दिया तीव्र पुरुषार्थी, साधारण पुरुषार्थ नहीं, साधारण पुरुषार्थ है तो राज्य के
साथी नहीं बनेंगे। और बाप यही चाहता है कि जितने भी बापदादा की मुरली अध्ययन करने
वाले गॉडली स्टूडेन्ट हैं, वह सबके सब क्या बनेंगे? फरिश्ता। सब बोझ उतर जायेगा।
कोई भी संस्कार का बोझ समाप्त हो जायेगा। तो इस वर्ष का होमवर्क क्या रहा? फरिश्ता
स्वरूप में रहना है, इसको ही कहा जाता है तीव्र पुरुषार्थ। अभी हर एक सेन्टर, हर
सप्ताह, हर स्टूडेन्ट की रिजल्ट देखे की तीव्र पुरुषार्थी रहे? अगर कोई भी बात आई,
उसके लिए सहयोगी बन करके, स्नेह से उनको हिम्मत दे और अपने सेन्टर को, स्टूडेन्ट को
तीव्र पुरुषार्थी बनाये, हर सप्ताह रिजल्ट देखे क्योंकि समय हलचल का होना ही है।
तो आज के संगम दिन पर
विदाई और बधाई के दिन पर चारों ओर के, जहाँ भी जो बैठे हैं बच्चे, बापदादा देख रहे
हैं, कैसे सभी साइंस के साधनों द्वारा देख भी रहे हैं और देख-देख कितने खुश हो रहे
हैं। तो चारों ओर के बच्चों को बापदादा विशेष वरदान दे रहे हैं “सदा सन्तुष्टमणि भव''।
सन्तुष्ट रहना, सन्तुष्ट करना। अच्छा।
अभी दादियां मिल करके
कोई नया प्लैन बनाओ। (दादी जानकी ने कहा - बाबा जनवरी मास का बहुत महत्व है। जनवरी
मास में अगर सभी मिलकर पुरुषार्थ करें, ऐसी सेवा का कोई प्लैन बन जाए, जो सबके दिल
से जिगर से निकले कि मेरा बाबा, ऐसी मेरी भावना है।)
बापदादा नये वर्ष में
नवीनता चाहते हैं, वही संस्कार नहीं चाहते हैं। एक-एक बच्चा बाप समान दिखाई दे। फालो
ब्रह्मा बाप। सरकमस्टांश, बातें सब कुछ बाप के आगे आई लेकिन फरिश्ता बन गये। तो
फरिश्ता बनना ही है, यह दृढ़ संकल्प हर एक अपने आपसे करे क्योंकि अपने आपसे करेंगे
तो अटेन्शन रहेगा। मुझे बनना है बस। और आपके बनने से नेचुरल वायब्रेशन फैलेगा। तो
अभी क्या लक्ष्य रखा? फरिश्ता बनना ही है, बोलो। पक्का है ना! अच्छा। सभी को बहुत
बहुत बापदादा के दिल का प्यार और मुबारक हो।
वरदान:-
सर्व खाते और
रिश्ते एक बाप से रखने वाले डबल लाइट फरिश्ता भव
डबल लाइट फरिश्ता बनने
के लिए देह के भान से भी परे रहो क्योंकि देह भान मिट्टी है, यदि इसका भी बोझ है तो
भारीपन है। फरिश्ता अर्थात् अपनी देह के साथ भी रिश्ता नहीं। बाप का दिया हुआ तन भी
बाप को दे दिया। अपनी वस्तु दूसरे को दे दी तो अपना रिश्ता खत्म हुआ। सब
हिसाब-किताब, सब लेन-देन बाप से बाकी सब पिछले खाते और रिश्ते खत्म - ऐसे सम्पूर्ण
बेगर ही डबल लाइट फरिश्ते हैं।
स्लोगन:-
अपनी विशेषताओं को प्रयोग में लाओ तो हर कदम में प्रगति का अनुभव करेंगे।
ये अव्यक्त इशारे -
परोपकार की भावना से सम्पन्न बन अपकारी पर भी उपकार करो
किसी भी आत्मा से कुछ
ले करके देने की इच्छा न हो, संकल्प में भी यह न आये कि यह करे तो मैं करुँ, यह बदले
तो मैं बदलूँ, कुछ वह बदले, कुछ मैं बदलूँ.... भिखारी को भी मालामाल बनाने वाला -
अपकारी के ऊपर उपकार करने वाला ही परोपकार की भावना से सम्पन्न है।