13-09-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति 15.11.2011 "बापदादा" मधुबन
“अभी निर्विघ्न और
एवररेडी रह 108 की माला तैयार करो, ब्रह्मा बाप समान सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो''
आज सर्वशक्तिवान बाप
अपने मास्टर सर्वशक्तिवान बच्चों को सर्व शक्तियों का खजाना देने आये हैं।
सर्वशक्तियों का खजाना कितना सहज प्राप्त होता है। एक सेकण्ड में जाना मेरा बाबा,
बाबा ने कहा मेरे बच्चे, इतने में ही खजानों के मालिक बन गये। तो हर एक बच्चे के
पास सर्व खजाने सदा साथ हैं ना! नशा है जो बाप का खजाना वह मेरा खजाना। अभी चेक करो
बाप ने तो हर बच्चे को सर्व खजाने दिये हैं, एक भी कम नहीं लेकिन वह सर्व खजाने हर
एक के पास सदा साथ हैं वा कोई कोई खजाना है और कोई खजाना कम है? बापदादा ने तो दिये
लेकिन हर एक के पास सर्व खजाने सदा ही हैं और सर्व खजाने समय पर कार्य में लाते रहते
हो? मालिक होके आर्डर करो तो समय पर खजाना अनुभव में आता है? बापदादा ने चारों ओर
के बच्चों के सेवा का उमंग देखा भी, सुना भी। चारों ओर अच्छे उमंग उत्साह से यह 75
वर्ष की जयन्ती मना रहे हैं, चैलेन्ज कर रहे हैं, अब परिवर्तन हुआ कि हुआ। चैलेन्ज
बहुत अच्छी कर रहे हैं। बापदादा बच्चों के उमंग उत्साह को देख-देख खुश होते हैं और
गीत क्या गाते? वाह बच्चे वाह! साथ-साथ बापदादा ने देखा चैलेन्ज तो बहुत अच्छी कर
रहे हैं उमंग उत्साह से, लेकिन साथ में बच्चों की स्वयं में सर्व धारणाओं का सफलता
का स्वरूप भी देखा। आप सब भी अपने सम्पन्न और सफलता का स्वरूप जानते हैं क्योंकि
सारे निमित्त बने हुए बच्चे सदा सम्पन्न और सफलतामूर्त बन गये हैं कि बनना है?
क्योंकि सुखमय संसार का आधार स्वरूप आप बच्चे हो। तो बापदादा ने सर्व बच्चों की
रिजल्ट देखी। जो आप आधारमूर्त हो, सिर्फ थोड़े से बच्चे नहीं, सर्व बच्चों का
चैलेन्ज है कि हम सुखमय संसार लाने के निमित्त हैं।
तो बापदादा सभी बच्चों
से पूछते हैं कि सुखमय संसार लाने के निमित्त बने हुए बच्चे सम्पूर्ण सम्पन्न
आधारमूर्त बन गये हैं? जो बापदादा की बच्चों में आशा है हर बच्चा सफलतामूर्त हो,
क्योंकि आप लोगों ने बाप के साथी बन संकल्प किया है और बड़े खुशी से चैलेन्ज की है,
परिवर्तन हुआ कि हुआ। तो अपने से पूछो विश्व परिवर्तन के निमित्त बच्चे स्व सम्पन्न
और सम्पूर्ण कहाँ तक बने हैं? क्योंकि राज्य स्थापन होना है तो पहले राज्य के
निमित्त बनी हुई आत्मायें निमित्त बनेंगी उसके बाद दूसरे निमित्त बन सकते हैं। तो
बापदादा ने देखा कि अब सम्पूर्ण बनने में कुछ मार्जिन रही हुई है। सेवा तो की लेकिन
सेवा की रिजल्ट में आपके साथी कितने बने? हिसाब निकालो कि जो सुनते हैं वह समीप
कितने आते हैं? बापदादा बच्चों की हिम्मत पर खुश है लेकिन अभी सर्विस की रिजल्ट में
और तीव्रता लानी है। हर समय आत्माओं को इतना समीप सम्बन्ध में लाओ, खुश बहुत होते
हैं अभी ब्रह्माकुमारियों के कर्तव्य को जानने में बहुत नजदीक आये हैं लेकिन बापदादा
ने पहले भी कहा वर्सा आत्माओं को बाप द्वारा मिलना है, तो बाप को जानें, समय को जानें,
स्वमान को जानें तब वर्से के अधिकारी बनें। अभी बाप आया है, बाप वर्सा दे रहा है,
यह बुद्धि में आये तब वर्सा लेके राज्य अधिकारी बनें।
चारों ओर यह आवाज फैले
जो गीत गाते हो हमारा बाबा आ गया। अब बापदादा यह रिजल्ट देखने चाहते हैं। परिवर्तन
हुआ है, सर्विस का लाभ हुआ है, मेहनत का फल मिला है लेकिन अभी बाप तक नहीं पहुंचे
हैं, इसका कोई प्लैन बनाओ। बाप की प्रत्यक्षता कैसे हो? राजधानी में राज्य करने वाले
भी निर्विघ्न बने हैं? अब परिवर्तन का बटन ड्रामा दबाये, एवररेडी? एवररेडी हैं? बटन
दबायें? क्या समझते हैं, बटन दबायें? एवररेडी हैं? क्योंकि सब तैयार चाहिए, राज्य
अधिकारी भी, रॉयल फैमिली भी, रॉयल प्रजा भी और साधारण प्रजा तो कोई बड़ी बात नहीं।
तो बापदादा आज बच्चों से रिजल्ट पूछते हैं। क्या समझते हो? बापदादा को बटन दबाने
में तो देरी नहीं लगेगी। तो पहली लाइन क्या समझती है? शक्तियां क्या समझती हैं?
पाण्डव क्या समझते हैं? जवाब दो। हाँ पाण्डव जवाब दो। दबायें बटन? एवररेडी हैं? (बाबा
आप मालिक हैं, आपको संकल्प आता है कि दबायें तो दबा दीजिये) बापदादा बच्चों से पूछते
हैं क्यों? क्योंकि बाप को तो राज्य में आना नहीं है। ब्रह्मा बाप को आना है। (यहाँ
बापदादा से मिलते रहें, यह बहुत अच्छा लगता है) यह बात तो अच्छी है लेकिन बाप समान
बनके बाप के साथ जीवन का अनुभव करें यह भी चाहिए ना। वह है? तैयार हैं? सिर्फ आप नहीं,
राजधानी है। आप राज्य किस पर करेंगे? राजधानी तो चाहिए ना! (सभी साथी हैं) सब तैयार
हैं? (बिल्कुल तैयार हैं) सम्पन्न बनने में तैयार हैं? अच्छा सभी सोच रहे हैं, कोई
बात नहीं।
बापदादा जानते हैं कि
अभी तक रेडी हैं एवररेडी बनना पड़े। जो बापदादा ने दो बातें कही थी कि सेकण्ड में
फुलस्टॉप लगाने वाले बच्चे चाहिए। व्यर्थ संकल्पों का नाम निशान न रहे। जिसको भी
सन्देश देते हो वह सन्देश सुन परिवर्तन करने के उमंग उत्साह में आ जाएं। अब बापदादा
यह रिजल्ट चाहते हैं। इसके लिए बापदादा बच्चों को राय देते हैं, आज्ञा भी करते हैं,
कि सेवा करते हो लेकिन जिनकी भी सेवा करते हो, एक ही समय पर तीन रूपों और तीन रीति
से सेवा करो। तीन रूप नॉलेजफुल, पावरफुल और लवफुल, इन तीनों रूपों से सेवा करो और
तीनों रीति से सेवा करो, वह तीन रीति है मन्सा-वाचा-कर्मणा एक ही समय, सिर्फ वाणी
से सेवा नहीं लेकिन वाणी के साथ मन्सा सेवा भी साथ-साथ हो। पावरफुल माइन्ड हो। तो
अभी आवश्यकता एक ही समय मन्सा पावरफुल हो, जिससे आत्माओं की भी मन्सा परिवर्तन हो
जाए। वाणी द्वारा सारी नॉलेज स्पष्ट हो जाए और कर्मणा द्वारा, कर्म द्वारा सेवा से
वह आत्मायें अनुभव करें कि सचमुच हम अपने परिवार में पहुंच गये हैं। परिवार की
फीलिंग आने से नजदीक के साथी बन जायें। तो बापदादा अभी एक ही समय तीन रूप की सेवा
इकट्ठी चाहते हैं। हो सकता है? हो सकता है? हाथ उठाओ, हो सकता है? अभी बापदादा ने
रिजल्ट में देखा वाणी द्वारा नॉलेजफुल बनते हैं लेकिन परिवार के साथी बनें, इसमें
अभी टाइम लगता है। तो बापदादा ने देखा कि समय की चैलेन्ज के साथ अभी सेवा में ऐसी
सेवा करो जो एक ही समय तीनों सेवा द्वारा प्राप्ति का अनुभव करें।
तो सभी मिलने के लिए
उमंग-उत्साह से पहुंच गये हैं, तो बापदादा बच्चों का उमंग देख खुश है। अभी अटेन्शन
देना है, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनने में क्योंकि कम से कम 108 की माला तैयार कर सको,
कर सकते हो? 108 की माला तैयार है? तैयार है? क्योंकि राजधानी में राज्य अधिकारी तो
वही बनेंगे ना। तो 108 रत्नों की लिस्ट अभी निकाल सकते हो? हाँ जी नहीं कहते हैं?
108 राज्य अधिकारी, फिर 16 हजार 108 राज्य अधिकारी के साथी। फिर उसके बाद है
नम्बरवार। तो बापदादा अभी समय प्रमाण, समय को समीप लाने वाले बच्चों से यही चाहते
हैं कि 108 की माला एवररेडी हो, बाप समान हो। तो पहली लाइन 108 नाम निकाल सकती है?
हाँ या ना करो ना! साकार में जब ब्रह्मा बाप थे तो कई बार ट्रायल की लेकिन फाइनल नहीं
हो सकी, लेकिन अब तो 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं, तो इस 75 वर्ष की जुबली में कोई तो
नवीनता करेंगे ना! तो नवीनता यही करो जो हर एक अपने को 108 की माला के मणके बनाये,
जो गिनती में आये हाँ 108 की माला तो बन गई क्योंकि जब पहले राज्य अधिकारी बनें तब
तो पीछे राज्य के सम्पर्क वाले बनें। उनको भी तो जगह चाहिए ना! तो बापदादा का कहने
का यही सार है कि अभी हर एक को अपना तीव्र पुरुषार्थ कर और दृढ़ संकल्प करना है कि
मुझे बाप समान बनना ही है क्योंकि बापदादा ने सुना दिया है कि अचानक परिवर्तन होना
है। उसके पहले कम से कम जो सेवा के निमित्त बने हुए हैं, ज़ोन हेड्स साथ में सेन्टर
इन्चार्ज, साथ में उनके नजदीक के साथी पाण्डव, वह सेन्टर हेड नहीं बनते लेकिन कोई न
कोई विशेष कार्य के निमित्त बने हुए जिनको सब विशेष आत्मा की नज़र से देखते हैं, उन
पाण्डवों को भी अभी तीव्र पुरुषार्थ कर स्व परिवर्तन की झलक बाहर स्टेज पर लानी
पड़ेगी, इसके लिए एवररेडी हैं? जो समझते हैं कि यह कार्य तो करना ही है, अपने को
बाप समान, ब्रह्मा बाप समान फालो फादर करना ही है, करना है तो हाथ उठाओ। हाथ तो इतने
उठाते हैं खुश कर देते हैं। अच्छा करते हैं। लेकिन हाथ के साथ दृढ़ संकल्प भी करो।
दृढ़ता की शक्ति बहुत सहयोग देती है।
तो बापदादा खुश है,
हाथ उठाने में होशियार सभी हैं लेकिन अभी दृढ़ता को प्रैक्टिकल में लायेंगे।
होशियार हैं ना बच्चे, दृढ़ता करते भी हैं लेकिन फिर दृढ़ता भिन्न-भिन्न रूप में
बदल जाती है, यह हो गया, यह हो गया। यह नहीं होता तो वह नहीं होता। इस बहाने में
बहुत होशियार हैं। तो अभी बापदादा क्या चाहते हैं? अभी हरेक को बाप समान बनना है,
मन्सा वाचा कर्मणा, सम्बन्ध सम्पर्क में आपको जो भी देखे, जो भी मिले वह यही कहे
वाह परिवर्तन वाह! बापदादा को भी अच्छा लगता है जो बच्चे निमित्त बने हुए हैं उनको
देखकरके भी खुशी होती है और मिलन में भी बहुत खुशी होती है।
तो आज क्या संकल्प
किया? बनना ही है। ब्रह्मा बाप समान बनना ही है। बनना है नहीं, बनना ही है। कोई भी
बातें आयें, बात के बजाए बाप को आगे रखो। तो सभी दूर बैठे हुए बच्चे, नजदीक सामने
बैठे हुए बच्चे दोनों को बापदादा देख-देख हर्षित हो रहे हैं। सभी बच्चे प्लैन बहुत
अच्छा बनाते हैं, अमृतवेले सब बहुत मीठी मीठी बातें करते हैं। मैजारिटी इतनी मीठी
बातें करते हैं जो बाप भी बातें सुन कुर्बान हो जाते हैं। लेकिन पता है फिर क्या
होता? जब कर्म के क्षेत्र में आते हैं, सम्बन्ध में आते हैं, सेवा में आते हैं, तो
जो बातें आती हैं उसमें थोड़ा थोड़ा बदल जाते हैं। अमृतवेले का जो उमंग उत्साह है
वह कर्म करते, सम्बन्ध में आते थोड़ा थोड़ा बदल जाता है।
अभी बापदादा एक कार्य
देते हैं, करने के लिए तैयार हो ना! कांध हिलाओ। हाथ उठाओ। बापदादा का संकल्प है कि
एक मास के लिए अपने को दृढ़ संकल्प के आधार से बाप समान स्थिति में स्थित कर सकते
हो? एक मास, कर सकते हैं कि ज्यादा है? जो समझते हैं एक मास दृढ़ता से, दृढ़ता को
साथी बनाना बाप को सदा सामने रखना, ब्रह्मा बाप को नयनों में समाये रखना और ब्रह्मा
बाप ने क्या किया, मन्सा वाचा कर्मणा वही करना है। चाहे कोई ने प्रैक्टिकल में देखा
या नहीं देखा लेकिन नॉलेज तो है ना! कोई भी कर्म करने के पहले यह चेक करना कि
ब्रह्मा बाप का यह संकल्प रहा, यह बोल रहा, यह कर्म रहा, यह संबंध रहा, यह सम्पर्क
रहा? पहले सोचो पीछे करो। हो सकता है? इसमें हाथ उठाओ। हो सकता है तो लम्बा हाथ
उठाओ। मातायें यहाँ एक्सरसाइज़ करती हो ना तो हाथ लम्बा उठाओ। आगे वाले भी उठायेंगे
ना? सब मधुबन वाले इसमें नम्बरवन आना। आगे आगे मधुबन वाले बैठे हैं ना। मधुबन में
सिर्फ शान्तिवन नहीं, जो भी हैं एक मास निर्विघ्न, हर सेन्टर भी निर्विघ्न, गुजरात
की टीचर्स हाथ उठाओ। गुजरात की टीचर्स समझती हैं हो सकता है, इसमें लम्बा हाथ उठाओ।
ऐसे ऐसे नहीं करो लम्बा उठाओ। हो सकता है? अच्छा। शान्तिवन निवासी हाथ उठाओ, थोड़े
हैं। जो भी बैठे हैं, पीछे भी बैठे हैं। तो मधुबन के 4-5 स्थान जो भी हैं वह करेंगे?
करेंगे हाथ उठाओ? मधुबन वाले दो हाथ उठाओ। गुजरात वाले जिज्ञासु भी, निमित्त टीचर्स
भी, निमित्त भाई भी सभी हाथ उठाओ, करेंगे। बड़ा हाथ उठाओ। पीछे वालों का हाथ दिखाई
नहीं देता है, अच्छा, गुजरात वाले खड़े हो जाओ। गुजरात तो बहुत आया है। आधा हॉल तो
गुजरात है। (गुजरात 15 हजार है, बाकी 3 हजार हैं) गुजरात वालों को बापदादा और
परिवार की तरफ से बहुत-बहुत मुबारक है, मुबारक है। जैसे अभी तालियां बजाई ना, वैसे
ही एक मास के बाद रिजल्ट में गुजरात नम्बरवन आयेगा! अच्छा है। संख्या तो बहुत अच्छी
है। बापदादा खुश होते हैं कि बच्चों को बाप से और मधुबन से दिल का प्यार है। बहुत
अच्छा है, अभी गुजरात कमाल करके दिखाना। इस एक मास की रिजल्ट में नम्बरवन आके दिखाना।
वैसे नम्बरवन सबको आना है। मधुबन वाले नम्बरवन आयेंगे ना, हाथ उठाओ। कुछ भी हो जाए,
क्या भी परिस्थिति हो जाए, परिस्थिति आयेगी, माया सुन रही है ना, तो माया अपना रूप
तो दिखायेगी लेकिन माया का काम है आना और आपका काम है विजय पाना। यह नहीं कहना, यह
हो गया, वह हो गया, यह नहीं करना। आयेगा, होगा, यह तो बापदादा पहले ही सुना देता है
क्योंकि माया सुन रही है, वह बहुत चतुर है लेकिन आप, माया कितनी भी चतुर हो आप तो
सर्वशक्तिवान के साथी हो, माया क्या करेगी। बापदादा देख रहे हैं, टी.वी. में देख रहे
हैं तो सभी नम्बरवन लाना। कोई टू नम्बर नहीं बनना, वन नम्बर। अच्छा।
बापदादा अभी सभी बच्चों
को एक ही श्रेष्ठ संकल्प सुनाने चाहते हैं कि अभी स्वयं भी निर्विघ्न रहो और अपने
साथियों को, सम्बन्ध में आने वालों को भी निर्विघ्न बनाओ। समय को समीप लाओ। दु:ख और
अशान्ति बापदादा बच्चों का देख नहीं सकता। अभी अपना राज्य जल्दी से जल्दी धरनी पर
लाओ। बापदादा को हर बच्चा प्यारा है, लास्ट नम्बर बच्चा जो है वह भी प्यारा है
क्योंकि कमजोर है ना। तो कमजोर पर और ही रहम ज्यादा आता है। आप सभी भी कैसी भी
स्थिति वाला, स्वभाव वाला हो लेकिन हमारा है, जैसे बाप हमारा है, वैसे परिवार हमारा
है, तो उसके स्वभाव संस्कार न देख उनको और ही सहयोग दो, सद्भावना दो, शुभ भावना दो।
अच्छा सामने वाले बच्चों को या दूर बैठे देखने वाले बच्चों को बापदादा एक एक बच्चे
को अपने सामने देख दृष्टि भी दे रहे हैं और मुबारक भी दे रहे हैं। अच्छा।
वरदान:-
वाचा द्वारा
ज्ञान रत्नों का दान करने वाले मास्टर नॉलेजफुल भव
जो वाचा द्वारा ज्ञान
रत्नों का दान करते हैं उन्हें मास्टर नॉलेजफुल का वरदान प्राप्त होता है। उनके
एक-एक शब्द की बहुत वैल्यु होती है। उनका एक-एक वचन सुनने के लिए अनेक आत्मायें
प्यासी होती हैं। उनके हर शब्द में सेन्स (सार) भरा होता है। उन्हें विशेष खुशी की
प्राप्ति होती है। उनके पास खजाना भरपूर रहता है इसलिए वे सदा सन्तुष्ट और हर्षित
रहते हैं। उनके बोल प्रभावशाली होते जाते हैं। वाणी का दान करने से वाणी में बहुत
गुण आ जाते हैं।
स्लोगन:-
स्वराज्य के मालिक बनो तो सम्पूर्ण वर्से का अधिकार मिल जायेगा।
ये अव्यक्त इशारे -
अब अपने दाता स्वरूप को प्रत्यक्ष करो
आप मास्टर दाता
प्राप्ति स्वरूप बच्चों को विश्व की आत्माओं प्रति रहम वा उमंग आना चाहिए कि हमारे
भाई अल्पकाल की इच्छा में कितने भटक रहे हैं, दाता के बच्चे अपने भाईयों के ऊपर दया
और रहम की दृष्टि डालो। महादानी, वरदानी बनो। चमकती हुई सन्तुष्ट मणियां बन सर्व को
सन्तोष दो।