21-07-2024     प्रात:मुरली  ओम् शान्ति 16.12.20 "बापदादा"    मधुबन


साक्षात ब्रह्मा बाप समान कर्मयोगी फरिश्ता बनो तब साक्षात्कार शुरू हो


आज ब्राह्मण संसार के रचता बापदादा अपने ब्राह्मण संसार को देख-देख हर्षित हो रहे हैं। कितना छोटा सा प्यारा संसार है। हर एक ब्राह्मण के मस्तक पर भाग्य का सितारा चमक रहा है। नम्बरवार होते हुए भी हर एक के सितारे में भगवान को पहचानने और बनने के श्रेष्ठ भाग्य की चमक है। जिस बाप को ऋषि, मुनि, तपस्वी नेती-नेती कहके चले गये, उस बाप को ब्राह्मण संसार की भोली-भाली आत्माओं ने जान लिया, पा लिया। यह भाग्य किन आत्माओं को प्राप्त होता है? जो साधारण आत्मायें हैं। बाप भी साधारण तन में आते हैं, तो बच्चे भी साधारण आत्मायें ही पहचानती हैं। आज की इस सभा में देखो, कौन बैठे हैं? कोई अरब-खरबपति बैठे हैं? साधारण आत्माओं का ही गायन है। बाप गरीब-निवाज़ गाया हुआ है। अरब-खरबपति निवाज़ नहीं गाया हुआ है। बुद्धिवानों का बुद्धि क्या किसी अरब-खरबपति की बुद्धि को नहीं पलटा सकता? क्या बड़ी बात है! लेकिन ड्रामा का बहुत अच्छा कल्याणकारी नियम बना हुआ है, परमात्म कार्य में फुरी-फुरी (बूँद-बूँद) तलाव होना है। अनेक आत्माओं का भविष्य बनना है। 10-20 का नहीं, अनेक आत्माओं का सफल होना है इसीलिए गायन है - बूँद-बूँद से तलाव। आप सभी जितना तन-मन-धन सफल करते रहते हो उतना ही सफलता के सितारे बन गये हो। सभी सफलता के सितारे बने हो? बने हो या अभी बनना है, सोच रहे हो? सोचो नहीं। करेंगे, देखेंगे, करना तो है ही... यह सोचना भी समय गँवाना है। भविष्य और वर्तमान की प्राप्ति गँवाना है।

बापदादा के पास कोई-कोई बच्चों का एक संकल्प पहुँचता है। बाहर वाले तो बिचारे हैं लेकिन ब्राह्मण आत्मायें बिचारे नहीं, विचारवान हैं, समझदार हैं। लेकिन कभी-कभी कोई-कोई बच्चों में एक कमजोर संकल्प उठता है, बतायें। बतायें? सभी हाथ उठा रहे हैं, बहुत अच्छा। कभी-कभी सोचते हैं कि क्या विनाश होना है या होना नहीं है! 99 का चक्कर भी पूरा हो गया, 2000 भी पूरा होना ही है। अब कब तक? बापदादा सोचते हैं - हंसी की बात है कि विनाश को सोचना अर्थात बाप को विदाई देना क्योंकि विनाश होगा तो बाप तो परमधाम में चले जायेंगे ना! तो संगम से थक गये हैं क्या? हीरे तुल्य कहते हो और गोल्डन को ज्यादा याद करते हो, होना तो है लेकिन इन्तजार क्यों करते? कई बच्चे सोचते हैं सफल तो करें लेकिन विनाश हो जाए कल परसों तो, हमारा तो काम में आया ही नहीं। हमारा तो सेवा में लगा नहीं। तो करें, सोच कर करें। हिसाब से करें, थोड़ा-थोड़ा करके करें। यह संकल्प बाप के पास पहुँचते हैं। लेकिन मानों आज आप बच्चों ने अपना तन सेवा में समर्पण किया, मन विश्व परिवर्तन के वायब्रेशन में निरन्तर लगाया, धन जो भी है, है तो प्राप्ति के आगे कुछ नहीं लेकिन जो भी है, आज आपने किया और कल विनाश हो जाता है तो क्या आपका सफल हुआ या व्यर्थ गया? सोचो, सेवा में तो लगा नहीं, तो क्या सफल हुआ? आपने किसके प्रति सफल किया? बापदादा के प्रति सफल किया ना? तो बापदादा तो अविनाशी है, वह तो विनाश नहीं होता! अविनाशी खाते में, अविनाशी बापदादा के पास आपने आज जमा किया, एक घण्टा पहले जमा किया, तो अविनाशी बाप के पास आपका खाता एक का पदमगुणा जमा हो गया। बाप बंधा हुआ है, एक का पदम देने के लिए। तो बाप तो नहीं चला जायेगा ना! पुरानी सृष्टि विनाश होगी ना! इसीलिए आपका दिल से किया हुआ, मजबूरी से किया हुआ, देखा-देखी में किया हुआ, उसका पूरा नहीं मिलता है। मिलता जरूर है क्योंकि दाता को दिया है लेकिन पूरा नहीं मिलता है इसलिए यह नहीं सोचो अच्छा अभी विनाश तो 2001 तक भी दिखाई नहीं देता है, अभी तो प्रोग्राम बन रहे हैं, मकान बन रहे हैं। बड़े-बड़े प्लैन बन रहे हैं, तो 2001 तक तो दिखाई नहीं देता है, दिखाई नहीं देगा। कभी भी इन बातों को अपना आधार बनाके अलबेले नहीं होना। अचानक होना है। आज यहाँ बैठे हैं, घण्टे के बाद भी हो सकता है। होना नहीं है, डर नहीं जाओ कि पता नहीं एक घण्टे के बाद क्या होना है! सम्भव है। इतना एवररेडी रहना ही है। शिव रात्रि तक करना है, यह सोचो नहीं। समय का इन्तजार नहीं करो। समय आपकी रचना है, आप मास्टर रचता हो। रचता रचना के अधीन नहीं होता है। समय रचना आपके ऑर्डर पर चलने वाली है। आप समय का इन्तजार नहीं करो, लेकिन अभी समय आपका इन्तजार कर रहा है। कई बच्चे सोचते हैं, 6 मास के लिए बापदादा ने कहा है तो 6 मास तो होगा ही। होगा ही ना! लेकिन बापदादा कहते हैं यह हद की बातों का आधार नहीं लो, एवररेडी रहो। निराधार, एक सेकेण्ड में जीवनमुक्ति। चैलेन्ज करते हो एक सेकेण्ड में जीवनमुक्ति का वर्सा लो। तो क्या आप एक सेकेण्ड में स्वयं को जीवनमुक्त नहीं बना सकते हैं? इसलिए इन्तजार नहीं, सम्पन्न बनने का इन्तजाम करो।

बापदादा को बच्चों के खेल देख करके हंसी भी आती है। कौन से खेल पर हंसी आती है? बतायें क्या? आज मुरली नहीं चला रहे हैं, समाचार सुना रहे हैं। अभी तक कई बच्चों को खिलौनों से खेलना बहुत अच्छा लगता है। छोटी-छोटी बातों के खिलौने से खेलना, छोटी बात को अपनाना, यह समय गंवाते हैं। यह साइडसीन्स हैं। भिन्न-भिन्न संस्कार की बातें वा चलन यह सम्पूर्ण मंजिल के बीच में साइडसीन्स हैं। इसमें रूकना अर्थात् सोचना, प्रभाव में आना, समय गँवाना, रूचि से सुनना, सुनाना, वायुमण्डल बनाना... यह है रूकना, इससे सम्पूर्णता की मंजिल से दूर हो जाते हैं। मेहनत बहुत, चाहना बहुत “बाप समान बनना ही है'', शुभ संकल्प, शुभ इच्छा है लेकिन मेहनत करते भी रूकावट आ जाती है। दो कान हैं, दो आंखें हैं, मुख है तो देखने में भी आता, सुनने में भी आता, बोलने में भी आता, लेकिन बाप का बहुत पुराना स्लोगन सदा याद रखो - देखते हुए नहीं देखो, सुनते हुए नहीं सुनो। सुनते हुए नहीं सोचो, सुनते हुए अन्दर समाओ, फैलाओ नहीं। यह पुराना स्लोगन याद रखना जरूरी है क्योंकि दिन प्रतिदिन जो भी सभी के जैसे पुराने शरीर के हिसाब चुक्तू हो रहे हैं, ऐसे ही पुराने संस्कार भी, पुरानी बीमारियां भी सबकी निकलके खत्म होनी है, इसीलिए घबराओ नहीं कि अभी तो पता नहीं और ही बातें बढ़ रही हैं, पहले तो थी नहीं। जो नहीं थी, वह भी अभी निकल रही हैं, निकलनी हैं। आपके समाने की शक्ति, सहन की शक्ति, समेटने की शक्ति, निर्णय करने की शक्ति का पेपर है। क्या 10 साल पहले वाले पेपर आयेंगे क्या? बी.ए. के क्लास का पेपर, एम.ए. के क्लास में आयेगा क्या? इसलिए घबराओ नहीं, क्या हो रहा है। यह हो रहा है, यह हो रहा है... खेल देखो। पेपर तो पास हो जाओ, पास विद ऑनर हो जाओ।

बापदादा ने पहले भी सुनाया है कि पास होने का सबसे सहज साधन है, बापदादा के पास रहो, जो आपके काम का नज़ारा नहीं है, उसको पास होने दो, पास रहो, पास करो, पास हो जाओ। क्या मुश्किल है? टीचर्स सुनाओ, मधुबन वाले सुनाओ। मधुबन वाले हाथ उठाओ। होशियार हैं मधुबन वाले आगे आ जाते हैं, भले आओ। बापदादा को खुशी है। अपना हक लेते हैं ना? अच्छा है, बापदादा नाराज नहीं है, भले आगे बैठो। मधुबन में रहते हैं तो कुछ तो पास खातिरी होनी चाहिए ना! लेकिन पास शब्द याद रखना। मधुबन में नई-नई बातें होती हैं ना, डाकू भी आते हैं। कई नई-नई बातें होती हैं, अभी बाप जनरल में क्या सुनायें, थोड़ा गुप्त रखते हैं लेकिन मधुबन वाले जानते हैं। मनोरंजन करो, मूंझो नहीं। या है मूंझना, या है मनोरंजन समझकर मौज में पास करना। तो मूंझना अच्छा है या पास करके मौज में रहना अच्छा है? पास करना है ना! पास होना है ना! तो पास करो। क्या बड़ी बात है? कोई बड़ी बात नहीं। बात को बड़ा करना या छोटा करना, अपनी बुद्धि पर है। जो बात को बड़ा कर देते हैं, उनके लिए अज्ञानकाल में भी कहते हैं कि यह रस्सी को सांप बनाने वाला है। सिन्धी भाषा में कहते हैं कि “नोरी को नाग'' बनाते हैं। ऐसे खेल नहीं करो। अभी यह खेल खत्म।

आज विशेष समाचार तो सुनाया ना, बापदादा अभी एक सहज पुरुषार्थ सुनाते हैं, मुश्किल नहीं। सभी को यह संकल्प तो है ही कि बाप समान बनना ही है। बनना ही है, पक्का है ना! फारेनर्स बनना ही है ना? टीचर्स बनना है ना? इतनी टीचर्स आई हैं! वाह! कमाल है टीचर्स की। बापदादा ने आज खुशखबरी सुनी, टीचर्स की। कौन सी खुशखबरी है, बताओ। टीचर्स को आज गोल्डन मैडल (बैज) मिला है। जिसको गोल्डन मैडल मिला है, हाथ उठाओ। पाण्डवों को भी मिला है? बाप की हमजिन्स तो रहनी नहीं चाहिए। पाण्डव ब्रह्मा बाप की हमजिन्स हैं। (उन्हों को और प्रकार का गोल्डन मिला है) पाण्डवों को रॉयल गोल्ड मैडल है। गोल्डन मैडल वालों को बापदादा की अरब-खरब बारी मुबारक है, मुबारक है, मुबारक है।

बापदादा जो देश-विदेश में सुन रहे हैं, और गोल्डन मैडल मिल चुका है, वह सभी भी समझें हमें भी बापदादा ने मुबारक दी है, चाहे पाण्डव हैं, चाहे शक्तियां हैं, किसी भी कार्य के निमित्त बनने वालों को खास यह दादियाँ, परिवार में रहने वालों को भी कोई विशेषता के आधार पर गोल्डन मैडल देती हैं। तो जिसको भी जिस भी विशेषता के आधार पर चाहे सरेण्डर के आधार पर, चाहे कोई भी सेवा में विशेष आगे बढ़ने वाले को दादियों द्वारा भी गोल्डन मैडल मिला है, तो दूर बैठे सुनने वालों को भी बहुत-बहुत मुबारक है। आप सब दूर बैठकर मुरली सुनने वालों के लिए, गोल्डन मैडल वालों के लिए एक हाथ की ताली बजाओ, वह आपकी ताली देख रहे हैं। वह भी हँस रहे हैं, खुश हो रहे हैं।

बापदादा सहज पुरुषार्थ सुना रहे थे - अभी समय तो अचानक होना है, एक घण्टा पहले भी बापदादा अनाउन्स नहीं करेगा, नहीं करेगा, नहीं करेगा। नम्बर कैसे बनेंगे? अगर अचानक नहीं होगा तो पेपर कैसे हुआ? पास विद ऑनर का सर्टीफिकेट, फाइनल सर्टीफिकेट तो अचानक में ही होना है इसलिए दादियों का एक संकल्प बापदादा के पास पहुँचा है। दादियां चाहती हैं कि अभी बापदादा साक्षात्कार की चाबी खोले, यह इन्हों का संकल्प है। आप सब भी चाहते हो? बापदादा चाबी खोलेंगे या आप निमित्त बनेंगे? अच्छा बापदादा चाबी खोले, ठीक है। बापदादा हाँ जी करते हैं, (ताली बजा दी) पहले पूरा सुनो। बाप-दादा को चाबी खोलने में क्या देरी है, लेकिन करायेगा किस द्वारा? प्रत्यक्ष किसको करना है? बच्चों को या बाप को? बाप को भी बच्चों द्वारा करना है क्योंकि अगर ज्योतिबिन्दु का साक्षात्कार भी हो जाए तो कई तो बिचारे..., बिचारे हैं ना! तो समझेंगे ही नहीं कि यह क्या है। अन्त में शक्तियां और पाण्डव बच्चों द्वारा बाप को प्रत्यक्ष होना है। तो बापदादा यही कह रहे हैं कि जब सब बच्चों का एक ही संकल्प है कि बाप समान बनना ही है, इसमें तो दो विचार नहीं हैं ना! एक ही विचार है ना। तो ब्रह्मा बाप को फॉलो करो। अशरीरी, बिन्दी ऑटोमेटिकली हो जायेंगे। ब्रह्मा बाप से तो सबका प्यार है ना! सबसे ज्यादा देखा गया है, वैसे तो सभी का है लेकिन फारेनर्स का ब्रह्मा बाप से बहुत प्यार है। इस नेत्र द्वारा देखा नहीं है लेकिन अनुभव के नेत्र द्वारा फारेनर्स ने मैजॉरिटी ब्रह्मा बाबा को देखा है और बहुत प्यार है। ऐसे तो भारत की गोपिकायें, गोप भी हैं फिर भी बापदादा फारेनर्स की कभी-कभी अनुभव की कहानियां सुनते हैं, भारतवासी थोड़ा गुप्त रखते हैं, वह ब्रह्मा बाबा के प्रति सुनाते हैं तो उन्हों की कहानियां बापदादा भी सुनते हैं और औरों को भी सुनाते हैं, मुबारक हो फारेनर्स को। लण्डन, अमेरिका, आस्ट्रेलिया, अफ्रीका, एशिया, रशिया, जर्मनी... मतलब तो चारों ओर के फारेनर्स को जो दूर बैठे भी सुन रहे हैं, उन्हों को भी बापदादा मुबारक देते हैं, खास ब्रह्मा बाबा मुबारक दे रहे हैं। भारत वालों का थोड़ा गुप्त है, प्रसिद्ध इतना नहीं कर सकते हैं, गुप्त रखते हैं। अभी प्रत्यक्ष करो। बाकी भारत में भी बहुत अच्छे-अच्छे हैं। ऐसी गोपिकायें हैं, अगर उन्हों का अनुभव आजकल के प्राइम मिनिस्टर, प्रेजीडेंट भी सुनें तो उनकी आंखों से भी पानी आ जाए। ऐसे अनुभव हैं लेकिन गुप्त रखते हैं इतना खोलते नहीं हैं, चांस भी कम मिलता है। तो बापदादा यह कह रहे हैं कि ब्रह्मा बाप से सबका प्यार तो है, इसीलिए तो अपने को क्या कहलाते हो? ब्रह्माकुमारी या शिवकुमारी? ब्रह्माकुमारी कहलाते हो ना, तो ब्रह्मा बाप से प्यार तो है ही ना। तो चलो अशरीरी बनने में थोड़ी मेहनत करनी भी पड़ती है लेकिन ब्रह्मा बाप अभी किस रूप में है? किस रूप में है? बोलो? (फरिश्ता रूप में है) तो ब्रह्मा से प्यार अर्थात् फरिश्ता रूप से प्यार। चलो बिन्दी बनना मुश्किल लगता है, फरिश्ता बनना तो उससे सहज है ना! सुनाओ, बिन्दी रूप से फरिश्ता रूप तो सहज है ना! आप एकाउन्ट का काम करते बिन्दी बन सकते हो? फरिश्ता तो बन सकते हो ना! बिन्दी रूप में कर्म करते हुए कभी-कभी व्यक्त शरीर में आ जाना पड़ता है लेकिन बापदादा ने देखा कि साइंस वालों ने एक लाइट के आधार से रोबोट (यंत्रमानव) बनाया है, सुना है ना! चलो देखा नहीं सुना तो है! माताओं ने सुना है? आपको चित्र दिखा देंगे। वह लाइट के आधार से रोबोट बनाया है और वह सब काम करता है। और फास्ट गति से करता है, लाइट के आधार से। और साइंस का प्रत्यक्ष प्रमाण है। तो बापदादा कहते हैं क्या साइलेन्स की शक्ति से, साइलेन्स की लाइट से आप कर्म नहीं कर सकते? नहीं कर सकते? इन्जीनियर और साइंस वाले बैठे हैं ना! तो आप भी एक रूहानी रोबोट की स्थिति तैयार करो। जिसको कहेंगे रूहानी कर्मयोगी, फरिश्ता कर्मयोगी। पहले आप तैयार हो जाना। इन्जीनियर हैं, साइंस वाले हैं तो पहले आप अनुभव करना। करेंगे? कर सकते हैं? अच्छा, ऐसे प्लैन बनाओ। बापदादा ऐसे रूहानी चलते फिरते कर्मयोगी फरिश्ते देखने चाहते हैं। अमृतवेले उठो, बापदादा से मिलन मनाओ, रूहरिहान करो, वरदान लो। जो करना है वह करो। लेकिन बापदादा से रोज़ अमृतवेले कर्मयोगी फरिश्ता भव का वरदान लेके फिर कामकाज में आओ। यह हो सकता है?

इस नये वर्ष में लक्ष्य रखो - संस्कार परिवर्तन, स्वयं का भी और सहयोग द्वारा औरों का भी। कोई कमजोर है तो सहयोग दो, न वर्णन करो, न वातावरण बनाओ। सहयोग दो। इस वर्ष की टॉपिक “संस्कार परिवर्तन''। फरिश्ता संस्कार, ब्रह्मा बाप समान संस्कार। तो सहज पुरुषार्थ है या मुश्किल है? थोड़ा-थोड़ा मुश्किल है? कभी भी कोई बात मुश्किल होती नहीं है, अपनी कमजोरी मुश्किल बनाती है,इसीलिए बापदादा कहते हैं “हे मास्टर सर्वशक्तिवान बच्चे, अभी शक्तियों का वायुमण्डल फैलाओ।'' अभी वायुमण्डल को आपकी बहुत-बहुत-बहुत आवश्यकता है। जैसे आजकल विश्व में पोल्यूशन की प्राबलम है, ऐसे विश्व में एक घड़ी मन में शान्ति सुख के वायुमण्डल की आवश्यकता है क्योंकि मन का पोल्यूशन बहुत है, हवा की पोल्यूशन से भी ज्यादा है। अच्छा।

चारों ओर के बापदादा समान बनना ही है, लक्ष्य रखने वाले, निश्चय बुद्धि विजयी आत्माओं को, सदा पुराने संसार और पुराने संस्कार को दृढ़ संकल्प द्वारा परिवर्तन करने वाले मास्टर सर्वशक्तिवान आत्माओं को, सदा किसी भी कारण से सरकमस्टांश से स्वभाव-संस्कार से, कमजोर साथियों को, आत्माओं को सहयोग देने वाले, कारण देखने वाले नहीं, निवारण करने वाले ऐसे हिम्मतवान आत्माओं को, सदा ब्रह्मा बाप के स्नेह का रिटर्न देने वाले कर्मयोगी फरिश्ते आत्माओं को बापदादा का यादप्यार और नमस्ते।

वरदान:-
शुभचिंतक स्थिति द्वारा सर्व का सहयोग प्राप्त करने वाले सर्व के स्नेही भव

शुभचिंतक आत्माओं के प्रति हर एक के दिल में स्नेह उत्पन्न होता है और वह स्नेह ही सहयोगी बना देता है। जहाँ स्नेह होता है, वहाँ समय, सम्पत्ति, सहयोग सदा न्यौछावर करने के लिए तैयार हो जाते हैं। तो शुभचिंतक, स्नेही बनायेगा और स्नेह सब प्रकार के सहयोग में न्यौछावर बनायेगा इसलिए सदा शुभचिंतन से सम्पन्न रहो और शुभचिंतक बन सर्व को स्नेही, सहयोगी बनाओ।

स्लोगन:-
इस समय दाता बनो तो आपके राज्य में जन्म-जन्म हर आत्मा भरपूर रहेगी।

सूचनाः- आज मास का तीसरा रविवार अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस है, सभी ब्रह्मा वत्स संगठित रूप में सायं 6.30 से 7.30 बजे तक विशेष अपने मास्टर सर्वशक्तिवान स्वरूप में स्थित हो, सर्व निर्बल, कमजोर आत्माओं को शुभ भावना, की किरणें दें। परमात्म शक्तियों का अनुभव करते हुए चारों ओर शक्तिशाली वायुमण्डल बनाने की सेवा करें