01-03-2026     प्रात:मुरली  ओम् शान्ति 09.03.2009 "बापदादा"    मधुबन


“परमात्म संग के रंग की और कम्बाइण्ड स्वरूप की यथार्थ होली मनाओ''


वरदान:-
सर्व आत्माओं के प्रति स्नेह और शुभचिंतक की भावना रखने वाले देही-अभिमानी भव

जैसे महिमा करने वाली आत्मा के प्रति स्नेह की भावना रहती है, ऐसे ही जब कोई शिक्षा का इशारा देता है तो उसमें भी उस आत्मा के प्रति ऐसे ही स्नेह की, शुभचिंतन की भावना रहे - कि यह मेरे लिए बड़े से बड़े शुभचिंतक हैं - ऐसी स्थिति को कहा जाता है देही-अभिमानी। अगर देही-अभिमानी नहीं हैं तो जरूर अभिमान है। अभिमान वाला कभी अपना अपमान सहन नहीं कर सकता।

स्लोगन:-
सदा परमात्म प्यार में खोये रहो तो दु:खों की दुनिया भूल जायेगी।

ये अव्यक्त इशारे - “निश्चय के फाउण्डेशन को मजबूत कर सदा निर्भय और निश्चिंत रहो"

जब कोई बड़े के हाथ में हाथ होता है तो छोटे की स्थिति बेफिक्र, निश्चिंत रहती है। आपको निश्चय है कि हर कर्म में बापदादा मेरे साथ भी है और हमारे इस अलौकिक जीवन का हाथ उनके हाथ में है अर्थात् जीवन उनके हवाले है तो ज़िम्मेवारी उनकी हो जाती है। सभी बोझ बाप के ऊपर रख अपने को हल्का कर दो तो सदा निश्चिंत रहेंगे और हर कार्य एक्यूरेट होगा।