01-06-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - बाप की श्रीमत है, इस पुरानी दुनिया से अपना
मुख मोड़ लो, जीवनमुक्ति के लिए तुम दैवी मैनर्स धारण करो''
प्रश्नः-
कौन से मैनर्स बाप के सिवाए कोई भी सिखला नहीं सकता है?
उत्तर:-
पवित्र बनना और बनाना - यह है सबसे बड़ा दैवी मैनर्स। तुम घर-गृहस्थ में रहते
पवित्र रहो, यह शिक्षा एक बाप ही देते हैं, दूसरा कोई दे नहीं सकता। तुम बच्चों का
बेहद का संन्यास है। तुम इस पुरानी दुनिया को ही बुद्धि से भूलते हो। तुम जानते हो
पवित्रता की धारणा से बाकी सब मैनर्स स्वत: आ जाते हैं।
गीत:-
आज अन्धेरे में हैं हम इंसान....
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1) एम ऑब्जेक्ट को सदा सामने रख दैवीगुण धारण करने हैं। सतोप्रधान दुनिया में चलने
के लिए पवित्रता के मैनर्स अपनाने हैं। बुद्धि से बेहद का संन्यास करना है।
2) मोस्ट बील्वेड बाप को और अपने सुखधाम को याद करना है। इस दु:खधाम से बुद्धि का
योग निकाल देना है।
वरदान:-
सर्व के गुण देखने वा सन्तुष्ट करने की उत्कण्ठा द्वारा सदा एकरस उत्साह में रहने
वाले गुणमूर्त भव
सदा एकरस उमंग-उत्साह में रहने के लिए जो भी संबंध में आते हैं उन्हें सन्तुष्ट करने
की उत्कण्ठा हो। जिसको भी देखो उससे हर समय गुण उठाते रहो। सर्व के गुणों का बल
मिलने से उत्साह सदाकाल के लिए रहेगा। उत्साह कम तब होता है जब औरों के भिन्न-भिन्न
स्वरूप, भिन्न-भिन्न बातें देखते, सुनते हो। लेकिन गुण देखने की उत्कण्ठा हो तो
एकरस उत्साह रहेगा और सर्व के गुण देखने से स्वयं भी गुणमूर्त बन जायेंगे।
स्लोगन:-
बेहद के वैराग्य वृत्ति का फाउण्डेशन मजबूत हो तो सेकण्ड में
अशरीरी बनना सहज है।
ये अव्यक्त इशारे - सदा हर्षित रहने के लिए अपनी नेचर को सरल
बनाओ, सहनशील बनो।
अपने इस चेहरे को सदैव हर्षित बनाना - यह संगमयुग की सबसे बड़ी
गिफ्ट है। चेहरे पर कभी भी कोई परेशानी की रेखा न हो। जैसे सम्पूर्ण चन्द्रमा कितना
सुन्दर लगता है, वैसे अपना चेहरा सदैव हर्षित रहे। चेहरा ऐसा चमकता हुआ हो जो और भी
आप के चेहरे में अपना रूप देख सकें, इसके लिए अपनी नेचर को सरल बनाओ, सहनशील बनो।