01-10-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - माया से डरो मत, भल कितना भी भुलाने की कोशिश करे लेकिन थको नहीं, अमृतवेले उठ याद में रहने का पूरा-पूरा पुरुषार्थ करो''

प्रश्नः-
पुरुषार्थ में आगे नम्बर कौन से बच्चे लेते हैं?

उत्तर:-
जो बाप पर पूरा-पूरा बलि चढ़ते हैं अर्थात् कुर्बान जाते हैं, सबसे आगे वही जाते। बाप पर बच्चे कुर्बान जाते और बच्चों पर बाप कुर्बान जाते। तुम अपना कखपन, पुराना तन-मन-धन बाप को देते और बाप तुम्हें विश्व की बादशाही देता इसलिए उसे गरीब निवाज़ कहा जाता है। गरीब भारत को ही दान देने बाप आये हैं।

गीत:-
नयनहीन को राह दिखाओ....

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) मन्दिर लायक बनने के लिए देह-अभिमान छोड़ देना है। रूहानी सेवा में लग जाना है।

2) अब घर जाने का समय है इसलिए जो भी हिसाब-किताब है, धन्धे धोरी के ख्यालात हैं, उन्हें उतार देना है। याद के यात्रा की मेहनत करनी है।

वरदान:-
सतसंग द्वारा रूहानी रंग लगाने वाले सदा हर्षित और डबल लाइट भव

जो बच्चे बाप को दिल का सच्चा साथी बना लेते हैं उन्हें संग का रूहानी रंग सदा लगा रहता है। बुद्धि द्वारा सत् बाप, सत शिक्षक और सतगुरू का संग करना - यही सतसंग है। जो इस सतसंग में रहते हैं वो सदा हर्षित और डबल लाइट रहते हैं। उन्हें किसी भी प्रकार का बोझ अनुभव नहीं होता। वे ऐसा अनुभव करते जैसे भरपूर हैं, खुशियों की खान मेरे साथ है, जो भी बाप का है वह सब अपना हो गया।

स्लोगन:-
अपने मीठे बोल और उमंग-उत्साह के सहयोग से दिलशिकस्त को शक्तिवान बनाओ।

ये अव्यक्त इशारे - परोपकार की भावना से सम्पन्न बन अपकारी पर भी उपकार करो

परोपकार की भावना से सम्पन्न बनने के लिए हर आत्मा के गुणों को ही देखो। किसी की कमज़ोरी वा अवगुण को देखते भी अपनी शुभ भावना से, सहयोग की कामना से उस आत्मा को भी गुणवान बनाने की शक्ति का दान दो। अपने समय को, सुखों को, नाम, शान, मान सर्व प्राप्ति की इच्छा को कुर्बान कर, लेने की इच्छा को छोड़ देने वाले महादानी बनो तब कहेंगे परोपकार की भावना से सम्पन्न।