01-12-2025        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - रोज़ विचार सागर मंथन करो तो खुशी का पारा चढ़ेगा, चलते-फिरते याद रहे कि हम स्वदर्शन चक्रधारी हैं''

प्रश्नः-
अपनी उन्नति करने का सहज साधन कौन-सा है?

उत्तर:-
अपनी उन्नति के लिए रोज़ पोतामेल रखो। चेक करो - आज सारा दिन कोई आसुरी काम तो नहीं किया? जैसे स्टूडेन्ट अपना रजिस्टर रखते हैं, ऐसे तुम बच्चे भी दैवी गुणों का रजिस्टर रखो तो उन्नति होती रहेगी।

गीत:-
दूर देश के रहने वाला.....

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) बाप ने राइट-रांग को समझने की बुद्धि दी है, उसी बुद्धि के आधार पर दैवीगुण धारण करने हैं, किसी को दु:ख नहीं देना है, आपस में भाई-बहन का सच्चा प्यार हो, कभी कुदृष्टि न जाए।

2) बाप के हर डायरेक्शन पर चल अच्छी तरह पढ़कर अपने आप पर आपेही कृपा करनी है। अपनी उन्नति के लिए पोतामेल रखना है, कोई दु:ख देने वाली बातें करता है तो सुनी-अनसुनी कर देना है।

वरदान:-
ईश्वरीय रॉयल्टी के संस्कार द्वारा हर एक की विशेषताओं का वर्णन करने वाले पुण्य आत्मा भव

सदा स्वयं को विशेष आत्मा समझ हर संकल्प वा कर्म करना और हर एक में विशेषता देखना, वर्णन करना, सर्व के प्रति विशेष बनाने की शुभ कल्याण की कामना रखना - यही ईश्वरीय रॉयल्टी है। रॉयल आत्मायें दूसरे द्वारा छोड़ने वाली चीज़ को स्वयं में धारण नहीं कर सकती इसलिए सदा अटेन्शन रहे कि किसी की कमजोरी वा अवगुण को देखने का नेत्र सदा बंद हो। एक दो के गुण गान करो, स्नेह, सहयोग के पुष्पों की लेन-देन करो - तो पुण्य आत्मा बन जायेंगे।

स्लोगन:-
वरदान की शक्ति परिस्थिति रूपी आग को भी पानी बना देती है।

अव्यक्त इशारे - अब सम्पन्न वा कर्मातीत बनने की धुन लगाओ

निराकारी स्वरूप की मुख्य शिक्षा का वरदान है “कर्मातीत भव''। आकारी स्वरूप अथवा फरिश्तेपन का वरदान है डबल-लाइट भव! डबल लाइट अर्थात् सर्व कर्म-बन्धनों से हल्के और लाइट अर्थात् सदा प्रकाश-स्वरूप में स्थित रहने वाले। ऐसे डबल लाइट रहने वाले सहज कर्मातीत स्थिति को प्राप्त कर सकते हैं। तो सेवाओं में आते अभी यह धुन लगाओ कि मुझे सम्पन्न वा कर्मातीत बनना ही है।