02-05-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - इस ड्रामा के अन्दर विनाश की भारी नूँध है, तुम्हें विनाश के पहले कर्मातीत बनना है''

प्रश्नः-
बाप के किन शब्दों की कशिश सम्मुख में बहुत होती है?

उत्तर:-
बाप जब कहते - तुम मेरे बच्चे हो, तो इन शब्दों की कशिश सम्मुख में बहुत होती है। सम्मुख सुनने से बहुत अच्छा लगता है। मधुबन सब बच्चों को आकर्षित करता है क्योंकि यहाँ है ईश्वरीय परिवार। यहाँ ब्राह्मणों का संगठन है। ब्राह्मण आपस में ज्ञान की ही लेन-देन करते हैं।

गीत:-
हमारे तीर्थ न्यारे हैं...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) तन, मन, धन से रूहानी सेवा में मददगार बनना है। सबको अल्फ का परिचय दे वर्से का अधिकारी बनाना है। विनाश के पहले कर्मातीत बनने के लिए बाप की याद में रहना है।

2) बाप समान मोह जीत बनना है। आत्मा का आत्मा से जो मोह हो गया है उसे निकाल एक बाप से लगन लगानी है।

वरदान:-
सर्वशक्तिमान् के साथ की स्मृति द्वारा समस्याओं को दूर भगाने वाले परमात्म स्नेही भव

जो बच्चे परमात्म स्नेही हैं वे स्नेही को सदा साथ रखते हैं इसलिए कोई भी समस्या सामने नहीं आती। जिनके साथ स्वयं सर्वशक्तिमान् बाप है उनके सामने समस्या ठहर नहीं सकती। समस्या पैदा हो और वहाँ ही खत्म कर दो तो वृद्धि नहीं होगी। अब समस्याओं का बर्थ कन्ट्रोल करो। सदा याद रखो कि सम्पूर्णता को समीप लाना है और समस्याओं को दूर भगाना है।

स्लोगन:-
प्यारे बनने का पुरुषार्थ नहीं, न्यारे बनने का पुरुषार्थ करो तो प्यारे स्वत: बन जायेंगे।

ये अव्यक्त इशारे - सदा अचल, अडोल, एकरस स्थिति का अनुभव करो

समय प्रति समय अनेक प्रकार के विघ्न आते हैं, कोई अच्छे अनन्य स्टूडेंट माया के वशीभूत हो एन्टी हो जाते और सेवा में डिस्टर्ब करते हैं। ऐसे समय पर घबराते तो नहीं हो! एक होता है उनके प्रति कल्याण के भाव से तरस रखना, लेकिन उसके कारण हलचल में आना अथवा व्यर्थ संकल्प चलाना, यह है हिलना। जो हर आत्मा के पार्ट को साक्षी-दृष्टा स्थिति में रह देखते हैं, वह अचल अडोल एकरस रहते हैं।