02-06-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम हो रूहानी पण्डे, तुम्हें गृहस्थ व्यवहार सम्भालते हुए, कमल फूल समान बन याद की यात्रा करनी और करानी है''

प्रश्नः-
बाप बच्चों का कौन सा श्रृंगार करते हैं? किस श्रृंगार के लिए मना करते हैं?

उत्तर:-
बाबा कहते मीठे बच्चे - मैं तुम्हारा रूहानी श्रृंगार करने आया हूँ, तुम कभी भी जिस्मानी श्रृंगार नहीं करना। तुम बेगर हो, तुम्हें फैशन का शौक नहीं होना चाहिए। दुनिया बहुत खराब है इसलिए जरा भी शरीर का फैशन नहीं करो।

गीत:-
आखिर वह दिन आया आज....

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) सच्चा-सच्चा रूहानी पण्डा बन सबको घर का रास्ता बताना है। शरीर निर्वाह अर्थ धन्धा करते याद की यात्रा में रहना है। कार्य-व्यवहार में तंग नहीं होना है।

2) ज्ञान श्रृंगार कर स्वयं को स्वर्ग की परी बनाना है। इस तमोप्रधान दुनिया में जिस्मानी श्रृंगार नहीं करना है। कलियुगी फैशन छोड़ देना है।

वरदान:-

बालक और मालिकपन के बैलेन्स द्वारा युक्तियुक्त चलने वाले सफलतामूर्त भव

जितना हो सके सर्विस के संबंध में बालकपन, अपने पुरुषार्थ की स्थिति में मालिकपन, सम्पर्क और सर्विस में बालकपन, याद की यात्रा और मंथन करने में मालिकपन, साथियों और संगठन में बालकपन और व्यक्तिगत में मालिकपन - इस बैलेन्स से चलना ही युक्तियुक्त चलना है। इससे सहज ही हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है, स्थिति एकरस रहती है और सहज ही सर्व के स्नेही बन जाते हैं।

स्लोगन:-

सोचना और करना समान हो तब कहेंगे विल पॉवर वाली शक्तिशाली आत्मा।

ये अव्यक्त इशारे - सदा हर्षित रहने के लिए अपनी नेचर को सरल बनाओ, सहनशील बनो।

हर्षित रहने का गुण पुरुषार्थ में बहुत मददगार बन सकता है, लेकिन जैसे सूरत हर्षित रहती है वैसे आत्मा भी सदैव हर्षित रहे, इस नेचुरल गुण को आत्मा में लाना है। सदा हर्षित रहेंगे तो फिर माया की कोई आकर्षण आकर्षित नहीं करेगी, यह बाप की गैरन्टी है। लेकिन सदा हर्षित रहने के लिए अपनी रूहानी शान में रहना और सहनशील बन साक्षीदृष्टा हो माया के खेल को देखना।