02-10-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - रावण की मत पर कोई भी विकर्म मत करो, पतितों
को पावन बनने का रास्ता बताओ''
प्रश्नः-
सयाने
सेन्सीबुल बच्चे कौन सा पुरुषार्थ करते हुए एक श्रीमत का ध्यान अवश्य रखेंगे?
उत्तर:-
सेन्सीबुल
बच्चे ऊंच पद पाने के लिए निरन्तर याद में रहने का पुरुषार्थ करते हुए सदैव इस
श्रीमत का ध्यान रखेंगे कि हमको निमित्त बन अनेक आत्माओं का कल्याण करना है। जो
बहुतों का कल्याण करते हैं, उनका कल्याण स्वत: ही हो जाता है।
गीत:-
तकदीर जगाकर
आई हूँ...
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
सब फिकरातों से छूटने के लिए ड्रामा को बुद्धि में यथार्थ रीति रखना है। जो बीता
कल्प पहले मुआफिक।
2) रात-दिन यही चिंतन
करना है कि हम पतितों को पावन बनाने का रास्ता कैसे बतायें! श्रीमत पर अपना और दूसरों
का कल्याण करना है।
वरदान:-
विश्व
परिवर्तन के श्रेष्ठ कार्य की जिम्मेवारी निभाते हुए डबल लाइट रहने वाले आधारमूर्त
भव
जो आधारमूर्त होते
हैं उनके ऊपर ही सारी जिम्मेवारी रहती है। अभी आप जिस रूप से, जहाँ भी कदम उठायेंगे
वैसे अनेक आत्मायें आपको फालो करेंगी, यह जिम्मेवारी है। लेकिन यह जिम्मेवारी अवस्था
को बनाने में बहुत मदद करती है क्योंकि इससे अनेक आत्माओं की आशीर्वाद मिलती है,
जिस कारण जिम्मेवारी हल्की हो जाती है, यह जिम्मेवारी थकावट मिटाने वाली है।
स्लोगन:-
दिल और दिमाग
दोनों का बैलेन्स रख सेवा करने से सफलता मिलती है।
ये अव्यक्त इशारे -
परोपकार की भावना से सम्पन्न बन अपकारी पर भी उपकार करो
स्वयं के सर्व खजानों
को अन्य आत्माओं प्रति दान देना - यही है परोपकार करना। ऐसे परोपकारी स्वयं को सर्व
खजानों से सम्पन्न बेगमपुर का बादशाह अनुभव करेंगे। उनके संकल्प में भी गम के
संस्कार इमर्ज नहीं हो सकते। जहाँ सर्विस है, वहाँ किसी के कमजोर संस्कारों को न
देख, उनके प्रति रहमदिल की दृष्टि रख, अपकारियों पंर भी उपकार करो।