03-05-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति 18.01.2010 "बापदादा" मधुबन
ब्रह्मा बाप समान
नष्टोमोहा स्मृति स्वरूप बनने के लिए, मन का टाइम-टेबल बनाकर कर्म करते कर्मयोगी
अशरीरी बनने का अभ्यास करो
वरदान:-
पावरफुल स्थिति
द्वारा रचना की सर्व आकर्षणों से दूर रहने वाले मास्टर रचयिता भव
जब मास्टर रचयिता,
मास्टर नॉलेजफुल की पावरफुल स्थिति वा नशे में स्थित रहेंगे तब रचना की सर्व आकर्षणों
से परे रह सकेंगे क्योंकि अभी रचना और भी भिन्न-भिन्न रंग-ढंग, रूप रचेगी इसलिए अभी
बचपन की भूलें, अलबेलेपन की भूलें, आलस्य की भूलें, बेपरवाही की भूलें जो रही हुई
हैं - उन्हें भूल कर अपने पावरफुल, शक्ति-स्वरूप, शस्त्रधारी स्वरूप, सदा जागती
ज्योति स्वरूप को प्रत्यक्ष करो तब कहेंगे मास्टर रचयिता।
स्लोगन:-
मन की स्थिति में ऐसा हार्ड बनो जो कोई भी परिस्थिति उसे पिघला न दे।
ये अव्यक्त इशारे -
सदा अचल, अडोल, एकरस स्थिति का अनुभव करो
किसी भी वातावरण में,
वायुमण्डल में रहो लेकिन स्थिति सदा अचल-अडोल एकरस हो। कभी निमित्त बने हुए कोई राय
देते हैं, उनमें कनफ्यूज़ नहीं होना, क्योंकि जो निमित्त बने हैं वह अनुभवी हो चुके
हैं। अगर उनका कोई डायरेक्शन स्पष्ट नहीं भी है तो भी हलचल में नहीं आना। धैर्य से
कहो इसको समझने की कोशिश करेंगे तब स्थिति एकरस अचल, अडोल रहेगी।