03-10-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - इस पुरानी दुनिया का अब अन्त है, इसलिए
संगमयुग पर तुम्हें भविष्य राजाई के लायक बनना है''
प्रश्नः-
बच्चों में
कौन सा शौक हो तो गद्दी नशीन बन सकते हैं?
उत्तर:-
आलराउन्ड
सर्विस करने का शौक हो तो गद्दीनशीन बन सकते हैं, जो आलराउन्ड सर्विस कर बहुतों को
सुख देते हैं उन्हें उसका उजूरा भी मिलता है। बच्चों को हमेशा हर सर्विस में हाज़िर
रहना चाहिए। ऐसा होशियार बनो जो माँ-बाप का शो करो। मम्मा बाबा कहते हो तो उन जैसा
बनकर दिखाओ।
गीत:-
इस पाप की
दुनिया से...
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
देह-अभिमान की ग्रहचारी ही यज्ञ में विघ्न रूप बनती है, इसलिए जितना हो सके
देही-अभिमानी बनने का पुरुषार्थ करना है।
2) अपनी पढ़ाई और
सतयुगी पद के पोजीशन की खुशी वा नशे में रहना है, श्रीमत पर चलना है। कोई भी भूल नहीं
करनी है।
वरदान:-
रूहानी
एक्सरसाइज और सेल्फ कन्ट्रोल द्वारा महीनता का अनुभव करने वाले फरिश्ता भव
बुद्धि की महीनता व
हल्कापन ब्राह्मण जीवन की पर्सनेलिटी है। महीनता ही महानता है। लेकिन इसके लिए रोज़
अमृतवेले अशरीरीपन की रूहानी एक्सरसाइज करो और व्यर्थ संकल्पों के भोजन की परहेज रखो।
परहेज के लिए सेल्फ कन्ट्रोल हो। जिस समय जो संकल्प रूपी भोजन स्वीकार करना हो उस
समय वही करो। व्यर्थ संकल्प का एकस्ट्रा भोजन नहीं करो तब महीन बुद्धि बन फरिश्ता
स्वरूप के लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे।
स्लोगन:-
महान आत्मा वह
हैं जो हर सेकण्ड, हर कदम श्रीमत पर एक्यूरेट चलते हैं।
ये अव्यक्त इशारे -
परोपकार की भावना से सम्पन्न बन अपकारी पर भी उपकार करो
विशेष रुप से अपनी
मन्सा अर्थात् संकल्प शक्ति द्वारा, वाणी की शक्ति द्वारा, अपने संग के रंग द्वारा,
सम्बन्ध के स्नेह द्वारा, खुशी के अखुट खज़ाने द्वारा अखण्ड़ दान करते रहना - यही
है परोपकार करना। कोई भी आत्मा सम्पर्क में आये तो खुशी के खज़ाने से सम्पन्न होकर
जाए, ऐसे अखण्ड़ दानी बनो।