04-05-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - निश्चयबुद्धि
बन बाप की हर आज्ञा पर चलते रहो, आज्ञा पर चलने से ही श्रेष्ठ बनेंगे''
प्रश्नः-
किन बच्चों को
सच्चा-सच्चा खुदाई खिदमतगार कहेंगे?
उत्तर:-
जो राजाई पाने
का पुरुषार्थ करते हैं और दूसरों को भी आप समान बनाते हैं। ऐसे ईश्वरीय सेवा पर लगने
वाले बच्चे सच्चे-सच्चे खुदाई खिदमतगार हैं। उन्हें देखकर दूसरे भी सहयोगी बनते
हैं।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) पिछाड़ी की दर्दनाक सीन से वा दु:खों से छूटने के लिए अभी से बाप की
श्रीमत पर चलना है। आप समान बनाने की सेवा श्रीमत पर करनी है।
2) सर्विस में बाप का राइट-हैण्ड बनना है। आत्मा को खुश करने का रास्ता बताना
है। सबका कल्याण करना है।
वरदान:-
स्वयं के
संकल्पों की उलझन अथवा सजाओं से भी परे रहने वाले पास विद आनर भव
पास विद आनर अर्थात् मन
में भी संकल्पों से सजा न खायें। धर्मराज के सजाओं की बात तो पीछे है परन्तु अपने
संकल्पों की भी उलझन अथवा सजाओं से परे रहना - यह पास विद आनर होने वालों की निशानी
है।। वाणी, कर्म, सम्बन्ध-सम्पर्क की बात तो मोटी है लेकिन संकल्पों में भी उलझन
पैदा न हो, ऐसी प्रतिज्ञा करो तब पास विद आनर बनेंगे।
स्लोगन:-
ज्ञान
घृत और योग की बत्ती ठीक हो तो खुशी का दीपक जगता रहेगा।
ये अव्यक्त इशारे
- सदा अचल, अडोल, एकरस स्थिति का अनुभव करो
दुनिया की किसी भी
प्रकार की हलचल अचल अडोल स्थिति में विघ्न न डाले। ऐसे विघ्न-विनाशक अचल अडोल बन हर
विघ्न को पार कर लो, जैसे यह विघ्न नहीं एक खेल है। पहाड़ राई के समान अनुभव हो
क्योंकि नॉलेजफुल आत्मायें पहले से ही जानती हैं कि यह सब तो आना ही है, होना ही
है।