05-05-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - सुख-शान्ति
का वरदान एक बाप से ही मिलता है, कोई देहधारी से नहीं, बाबा आये हैं - तुम्हें
मुक्ति-जीवनमुक्ति की राह दिखाने''
प्रश्नः-
बाप के साथ
जाने और सतयुग आदि में आने का पुरुषार्थ क्या है?
उत्तर:-
बाप के साथ
जाना है तो पूरा पवित्र बनना है। सतयुग आदि में आने के लिए और संग बुद्धियोग तोड़
एक बाप की याद में रहना है। आत्म-अभिमानी जरूर बनना है। एक बाप की मत पर चलेंगे तो
ऊंच पद का अधिकार मिल जायेगा।
गीत:-
नयन हीन को
राह दिखाओ....
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) बाप जो नॉलेज देते हैं उसे पूरा अटेन्शन देकर पढ़ना है। ज्ञान के
तीसरे नेत्र से अपने 84 जन्मों को जान अब अन्तिम जन्म में पावन बनना है।
2) रावण के श्राप से बचने के लिए एक बाप की याद में रहना है। 5 विकारों का दान
दे देना है। एक बाप की मत पर चलना है।
वरदान:-
ताज और तिलक
को धारण कर बापदादा के मददगार बनने वाले दिलतख्तनशीन भव
जब कोई तख्त पर बैठते हैं
तो तिलक और ताज उनकी निशानी होती है। ऐसे जो दिल तख्तनशीन हैं उनके मस्तक पर सदैव
अविनाशी आत्मा की स्थिति का तिलक दूर से ही चमकता हुआ नजर आता है। सर्व आत्माओं के
कल्याण की शुभ भावना उनके नयनों से वा मुखड़े से दिखाई देती है। उनका हर संकल्प,
वचन और कर्म बाप के समान होता है।
स्लोगन:-
सरल
याद के लिए सरलता का गुण धारण करो, संस्कारों को सरल बनाओ।
ये अव्यक्त इशारे
- सदा अचल, अडोल, एकरस स्थिति का अनुभव करो
जिसको ड्रामा के
ज्ञान की शक्ति प्रैक्टिकल जीवन में धारण है वह कभी भी हलचल में नहीं आ सकते। सदा
एकरस, अचल अडोल बनने और बनाने की विशेष शक्ति यह ड्रामा की प्वाइंट है। इसे शक्ति
के रूप में धारण करने वाले कभी हार नहीं खा सकते। इस कल्याणकारी ड्रामा की हर सीन
में कोई न कोई कल्याण समाया हुआ है, धैर्यवत बन साक्षी हो देखने का अभ्यास करो तो
अचल-अडोल रहेंगे।