05-06-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“ मीठे बच्चे - बाप के साथ - साथ तभी चल सकेंगे जब इस पुरानी दुनिया से बेहद का वैराग्य होगा ''

प्रश्नः-
भगवान समर्थ होते हुए भी उसके रचे हुए यज्ञ में विघ्न क्यों पड़ते हैं?

उत्तर:-
क्योंकि रावण भगवान से भी तीखा है। जरूर जब उसका राज्य छीना जायेगा तो वह विघ्न डालेगा ही। शुरू से लेकर ड्रामा अनुसार इस यज्ञ में विघ्न पड़ते ही आये हैं, पड़ने ही हैं। हम पतित दुनिया से पावन दुनिया में ट्रांसफर हो रहे हैं तो जरूर पतित मनुष्य विघ्न डालेंगे।

गीत:-
ओ दूर के मुसाफिर...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) ज्ञान और योग में मजबूत बनना है। अगर कोई बन्धन नहीं है तो बन्धनों में जानबूझकर फॅसना नहीं है। बाल ब्रह्मचारी होकर रहना है।

2) अभी हमारी चढ़ती कला है, बाबा हमारे सब दु:ख दूर करने, श्राप मिटाए वर्सा देने आये हैं। बाप और वर्से को याद कर अपार खुशी में रहना है। जांच करनी है कि हमारा बुद्धियोग कहाँ भटकता तो नहीं है।

वरदान:-
समाने और सामना करने की शक्ति द्वारा सेवा में सफलता प्राप्त करने वाले रूहानी सेवाधारी भव

रूहानी सेवाधारियों को सेवा के सिवाए कुछ भी सूझता नहीं, वे मन्सा-वाचा-कर्मणा सर्विस से एक सेकण्ड भी रेस्ट नहीं लेते इसलिए बेस्ट बन जाते हैं। वे सेवाओं में सफलता प्राप्त करने के लिए सदा यही याद रखते कि समाना और सामना करना - यही हमारा निशाना है। वे अपने पुराने संस्कारों को समाते हैं और सामना माया से करते न कि दैवी परिवार से। ऐसे बच्चे जो नॉलेजफुल के साथ-साथ पावरफुल भी हैं उन्हें ही कहा जाता है रूहानी सेवाधारी।

स्लोगन:-
छोटी बात को बड़ा नहीं करो, वातावरण को शक्तिशाली बनाओ।

ये अव्यक्त इशारे - सदा हर्षित रहने के लिए अपनी नेचर को सरल बनाओ , सहनशील बनो।

दुनिया में लोग जिंदा होते भी नाउम्मींदी की चिता पर बैठे हुए हैं, ऐसी आत्माओं को मरजीवा बनाओ, नये जीवन का दान दो। अपने खुशनसीब, हर्षित मुख चेहरे द्वारा उन्हें मानव जीवन में जीना सिखाओ। आपको देखकर उनमें हिम्मत, उमंग-उत्साह आ जाये, इसके लिए अपनी नेचर को सरल बनाओ और सदा कमल समान स्थिति के आसन पर डबल लाइट स्थिति में स्थित रहो।