05-10-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम जिसकी आज तक महिमा गाते थे, वही अब तुम्हारे सामने हाज़िर है, इसलिए सदैव खुशी में नाचते रहो, किसी बात का ग़म न हो''

प्रश्नः-
पुरुषार्थी बच्चे अपने दिल के अन्दर कौन सी जांच अवश्य करेंगे?

उत्तर:-
अभी तक मुझ आत्मा में कोई छोटा-मोटा काँटा तो नहीं है? काम का काँटा सबसे तीखा है। क्रोध का काँटा भी बहुत खराब है। देवतायें क्रोधी नहीं होते इसलिए मीठे बच्चे कोई काँटा हो तो निकाल दो। अपने आपको घाटे में मत डालो।

गीत:-
तुम मात पिता...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) अविनाशी बाप से सच्चा-सच्चा अविनाशी व्यापार करना है। उस सौदे के साथ इस सौदे में भी समय देना है। ज्ञान गंगा बन सबको पावन बनाना है।

2) ब्राह्मण जीवन का आधार मुरली है जो प्यार से सुननी और सुनानी है। अन्दर कोई भी काँटा हो तो उसे निकाल देना है। अवगुणों का दान करना है।

वरदान:-
रहमदिल की भावना द्वारा अपकारी पर भी उपकार करने वाले शुभचिंतक भव

कैसी भी कोई आत्मा, चाहे सतोगुणी, चाहे तमोगुणी सम्पर्क में आये लेकिन सभी के प्रति शुभचिंतक अर्थात् अपकारी पर भी उपकार करने वाले। कभी किसी आत्मा के प्रति घृणा दृष्टि न हो क्योंकि जानते हो यह अज्ञान के वशीभूत है, बेसमझ है। उनके ऊपर रहम वा स्नेह आये, घृणा नहीं। शुभचिंतक आत्मा ऐसा नहीं सोचेगी कि इसने ऐसा क्यों किया लेकिन इस आत्मा का कल्याण कैसे हो - यही है शुभचिंतक स्टेज।

स्लोगन:-
तपस्या के बल से असम्भव को सम्भव कर सफलता मूर्त बनो।

ये अव्यक्त इशारे - परोपकार की भावना से सम्पन्न बन अपकारी पर भी उपकार करो

वह त्रिकालदर्शी होने के कारण आत्मा के सम्पूर्ण सहयोग को सामने रखते हुए, हर आत्मा की कमज़ोरी को परखते हुए उसकी कमज़ोरी को स्वयं में धारण नहीं करेगा, वर्णन नहीं करेगा लेकिन अन्य आत्माओं की कमज़ोरी का काँटा कल्याणकारी स्वरूप से समाप्त कर देगा। कांटे के बजाए - कांटे को भी फूल बना देगा।