06-03-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - सच्चे
सैलवेशन आर्मी बन सबको इस पाप की दुनिया से पुण्य की दुनिया में ले चलना है, सबके
डूबे हुए बेड़े को पार लगाना है''
प्रश्नः-
कौन सा निश्चय
हर एक बच्चे की बुद्धि में नम्बरवार बैठता है?
उत्तर:-
पतित-पावन
हमारा मोस्ट बील्वेड बाबा, हमें स्वर्ग का वर्सा दे रहा है, यह निश्चय हर एक की
बुद्धि में नम्बरवार बैठता है। अगर पूरा निश्चय किसी को हो भी जाए तो माया सामने खड़ी
है। बाप को भूल जाते हैं, फेल हो पड़ते हैं। जिन्हें निश्चय बैठ जाता है वह पावन
बनने के पुरुषार्थ में लग जाते हैं। बुद्धि में रहता है, अब तो घर जाना है।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) विद् रिस्पेक्ट पास होने के लिए सजाओं से छूटने का पुरुषार्थ करना
है। याद में रहने से ही स्कॉलरशिप लेने के अधिकारी बन सकेंगे।
2) सच्चा-सच्चा पाण्डव बन सबको रूहानी यात्रा करानी है। किसी भी प्रकार की हिंसा
नहीं करनी है।
वरदान:-
लाइट हाउस की
स्थिति द्वारा पाप कर्मो को समाप्त करने वाले पुण्य आत्मा भव
जहाँ लाइट होती है वहाँ
कोई भी पाप का कर्म नहीं होता है। तो सदा लाइट हाउस स्थिति में रहने से माया कोई
पाप कर्म नहीं करा सकती, सदा पुण्य आत्मा बन जायेंगे। पुण्य आत्मा संकल्प में भी
कोई पाप कर्म नहीं कर सकती। जहाँ पाप होता है वहाँ बाप की याद नहीं होती। तो दृढ़
संकल्प करो कि मैं पुण्य आत्मा हूँ, पाप मेरे सामने आ नहीं सकता। स्वप्न वा संकल्प
में भी पाप को आने न दो।
स्लोगन:-
जो हर
दृश्य को साक्षी होकर देखते हैं वही सदा हर्षित रहते हैं।
ये अव्यक्त
इशारे-“निश्चय के फाउण्डेशन को मजबूत कर सदा निर्भय और निश्चिंत रहो"
निश्चयबुद्धि बच्चे
सदा हर्षित और निश्चिंत रहते हैं। चिन्ता खुशी को खत्म करती है और निश्चिन्त हैं तो
सदा खुशी रहेगी, जब किसी भी बात में क्यों हुआ, कैसे हुआ, क्या होगा!... यह प्रश्न
आते हैं तब चिंता होती है। क्या, क्यों, कैसे - ये चिन्ता की लहर है। कई फिर कहते
हैं कि मेरे से ही क्यों होता है? मेरे पीछे ये बंधन क्यों है! मेरे पीछे माया क्यों
आती है! मेरा ही हिसाब-किताब कड़ा है, क्यों? तो ‘क्यों' आना माना चिन्ता की लहर।
जो इन चिन्ताओं से परे है वही निश्चिंत है।