06-06-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - अमृतवेले का समय बहुत-बहुत अच्छा है, इसलिए सवेरे-सवेरे उठकर एकान्त में बैठ बाबा से मीठी-मीठी बातें करो''

प्रश्नः-
कौन-सी नॉलेज निरन्तर योगी बनने में बहुत मदद करती है?

उत्तर:-
ड्रामा की। जो कुछ बीता, ड्रामा की भावी। ज़रा भी स्थिति हलचल में न आये। भल कैसी भी परिस्थिति हो, अर्थक्वेक आ जाए, धन्धे में घाटा पड़ जाए लेकिन ज़रा भी संशय पैदा न हो - इसको कहते हैं महावीर। अगर ड्रामा की यथार्थ नॉलेज नहीं तो आंसू बहाते रहेंगे। निरन्तर योगी बनने में ड्रामा की नॉलेज बहुत मदद करती है।

गीत:-
ओम् नमो शिवाए........

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) श्रीमत पर अपने आपको देखना है कि इस विनाश काल में मेरी एक बाप से सच्ची प्रीत है? और सब संग तोड़ एक संग जोड़ी है? कभी कोई विकर्म करके असुर तो नहीं बनते? ऐसी चेकिंग कर स्वयं को परिवर्तन करना है।

2) इस शरीर पर कोई भरोसा नहीं इसलिए अपना सब कुछ सफल करना है। अपनी स्थिति एकरस, अचल बनाने के लिए ड्रामा के राज़ को बुद्धि में रखकर चलना है।

वरदान:-
बार-बार हार खाने के बजाए बलिहार जाने वाले मास्टर सर्वशक्तिमान् विजयी भव

स्वयं को सदा विजयी रत्न समझकर हर संकल्प और कर्म करो तो कभी भी हार हो नहीं सकती। मास्टर सर्व-शक्तिमान् कभी हार नहीं खा सकते। यदि बार-बार हार होती है तो धर्मराज की मार खानी पड़ेगी और हार खाने वालों को भविष्य में हार बनाने पड़ेंगे, द्वापर से अनेक मूर्तियों को हार पहनाने पड़ेंगे इसलिए हार खाने के बजाए बलिहार हो जाओ, अपने सम्पूर्ण स्वरूप को धारण करने की प्रतिज्ञा करो तो विजयी बन जायेंगे।

स्लोगन:-
“कब'' शब्द कमजोरी सिद्ध करता है इसलिए “कब'' करेंगे नहीं, अब करना है।

ये अव्यक्त इशारे - सदा हर्षित रहने के लिए अपनी नेचर को सरल बनाओ, सहनशील बनो।

इस बेहद की स्टेज पर मैं खिलाड़ी हूँ। यह खिलाड़ी की स्टेज सदा हर्षितमुख रहने का अनुभव कराती है। किसी भी प्रकार की कोई भी बात, जिसको दुनिया वाले आपदा समझते हैं लेकिन खिलाड़ी बन खेल करने वाले और साक्षी हो खेल देखने वाले, ऐसी आपदा के रूप को खेल समझ, सहनशीलता की शक्ति से मनोरंजन का अनुभव करते हैं।