06-10-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - अब सीखने के साथ-साथ टीचर बन सिखाना भी है, यह पढ़ाई इस अन्तिम जन्म के लिए ही है, इसलिए अच्छी रीति पढ़ो और पढ़ाओ''

प्रश्नः-
सतयुगी राजधानी किस आधार पर स्थापन होती है?

उत्तर:-
संगम की पढ़ाई के आधार पर। जो अच्छी रीति पढ़ते हैं अथवा जिन पर ब्रह्स्पति की दशा है वह सूर्यवंशी में आते हैं। जो पढ़ते नहीं, सर्विस नहीं करते उन पर बुध की दशा बैठती, वह जैसे बुद्धू हैं। वह प्रजा में आ जाते हैं। ऊंच प्रजा, नौकर चाकर आदि सब इस समय की पढ़ाई के आधार पर ही बनते हैं।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) अब टॉकी से मूवी, मूवी से साइलेन्स में जाना है, इसलिए टॉकी (बातचीत) बहुत कम करनी है। रॉयल्टी से बहुत आहिस्ते बोलना है।

2) नॉलेज समझने के बाद तीव्र पुरुषार्थ कर सतोप्रधान बनना है। याद का चार्ट रखना है।

वरदान:-
इस लोक के लगाव से मुक्त बन अव्यक्त वतन का सैर करने वाले उड़ता पंछी भव

बुद्धि रूपी विमान से अव्यक्त वतन व मूलवतन का सैर करने के लिए उड़ता पंछी बनो। बुद्धि द्वारा जब चाहो, जहाँ चाहो पहुंच जाओ। यह तब होगा जब बिल्कुल इस लोक के लगाव से परे रहेंगे। यह असार संसार है, इस असार संसार से जब कोई काम नहीं, कोई प्राप्ति नहीं तो बुद्धि द्वारा भी जाना बन्द करो। यह रौरव नर्क है इसमें जाने का संकल्प और स्वप्न भी न आये।

स्लोगन:-
अपने चेहरे और चलन से सत्यता की सभ्यता का अनुभव कराना ही श्रेष्ठता है।

ये अव्यक्त इशारे - परोपकार की भावना से सम्पन्न बन अपकारी पर भी उपकार करो

जो परोपकार की भावना से सम्पन्न है, वह सदा सन्तुष्टमणी के समान स्वयं भी सन्तुष्ट होगा और सर्व को भी सन्तुष्ट करने वाला होगा। कमाल यह है जो होपलेस में होप पैदा कर देगा, जिसके प्रति सब निराशा दिखायें, ऐसे व्यक्ति वा ऐसी स्थिति में सदा के लिए उनकी आशा के दीपक जगा देगा। अपने उपकार की शुभ भावना से, स्नेह से, शक्ति से, मीठे बोल से, उत्साह-उमंग के सहयोग से दिलशिकस्त को शक्तिवान बना देगा अर्थात् भिखारी को बादशाह बना देगा।