07-06-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति 31.03.2010 "बापदादा" मधुबन
पूर्वज और पूज्य के
स्वमान में रह मन्सा द्वारा सर्व की पालना करो, पूरे वृक्ष को सकाश दो
वरदान:-
स्व-स्थिति
द्वारा सर्व परिस्थितियों को पार करने वाले निराकारी, अलंकारी भव
जो अलंकारी हैं वे कभी
देह-अहंकारी नहीं बन सकते। निराकारी और अलंकारी रहना - यही है मन्मनाभव, मध्याजीभव।
जब ऐसी स्व-स्थिति में सदा स्थित रहते तो सर्व परिस्थितियों को सहज ही पार कर लेते,
इससे अनेक पुराने स्वभाव समाप्त हो जाते हैं। स्व में आत्मा का भाव देखने से
भाव-स्वभाव की बातें समाप्त हो जाती हैं और सामना करने की सर्व शक्तियां स्वयं में
आ जाती हैं।
स्लोगन:-
संकल्प का एक कदम आपका तो सहयोग के हजार कदम बाप के।
ये अव्यक्त इशारे -
सदा हर्षित रहने के लिए अपनी नेचर को सरल बनाओ, सहनशील बनो।
जो अपनी वा दूसरों की
बीती को नहीं देखते हैं, सेकण्ड में फुलस्टाप लगाते हैं वह सरलचित होते हैं और जो
सरलचित होते हैं उनके नयनों से, मुख से, चलन से मधुरता व हर्षितमुखता प्रत्यक्ष रूप
में देखने में आती है। ऐसी सरलचित स्थिति वाले दूसरों को भी सरलचित बना देते हैं।
सरलचित माना जो बात सुनी, देखी, की, वह सार-युक्त हो और सार को ही उठाये।