07-10-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - देरी से आते हुए तेज़ पुरुषार्थ करो तो
बहुत आगे जा सकते हो, दूसरों की चिंता छोड़ अपने पुरुषार्थ में लग जाओ''
प्रश्नः-
कौन सा
कर्तव्य एक बाप का है जो कोई मनुष्य का नहीं हो सकता?
उत्तर:-
मनुष्य को
देवता बनाना, उसे शान्तिधाम, सुखधाम का मालिक बना देना, यह कर्तव्य एक बाप का ही है
जो कोई मनुष्य नहीं कर सकता। तुम्हें निश्चय है संगम पर ही हम भगवानुवाच सुनते हैं।
अभी स्वयं भगवान कल्प पहले मुआफिक राजयोग सिखला रहे हैं।
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
जब कोई क्रोध करता है तो बहुत-बहुत शान्त रहना है। क्रोधी के साथ क्रोधी नहीं बन
जाना है। माया के किसी भी तूफान से हारना नहीं है।
2) सवेरे-सवेरे बाप
को याद करना है, अपनी कमाई जमा करनी है। पवित्रता की पक्की राखी बांधनी है।
वरदान:-
अपने अव्यक्त
शान्त स्वरूप द्वारा वातावरण को अव्यक्त बनाने वाले साक्षात मूर्त भव
जैसे सेवाओं के और
प्रोग्राम बनाते हो ऐसे सवेरे से रात तक याद की यात्रा में कैसे और कब रहेंगे यह भी
प्रोग्राम बनाओ और बीच-बीच में दो तीन मिनट के लिए संकल्पों की ट्रैफिक को स्टॉप कर
लो, जब कोई व्यक्त भाव में ज्यादा दिखाई दे तो उनको बिना कहे अपना अव्यक्ति शान्त
रूप ऐसा धारण करो जो वह भी इशारे से समझ जाये, इससे वातावरण अव्यक्त रहेगा। अनोखापन
दिखाई देगा और आप साक्षात्कार कराने वाले साक्षात मूर्त बन जायेंगे।
स्लोगन:-
सम्पूर्ण
सत्यता ही पवित्रता का आधार है।
ये अव्यक्त इशारे -
परोपकार की भावना से सम्पन्न बन अपकारी पर भी उपकार करो
अगर कोई आपके सहयोगी
भाई व बहन, परिवार की आत्मायें, बेसमझी वा बालहठ से अल्पकाल की वस्तु को सदाकाल की
प्राप्ति समझ, अल्पकाल का मान-शान-नाम वा अल्पकाल की प्राप्ति की इच्छा रखती हैं तो
दूसरे को मान देकर के स्वयं निर्मान बनना यही परोपकार है। यह देना ही सदा के लिए
लेना है।