08-03-2026     प्रात:मुरली  ओम् शान्ति 18.01.2009 "बापदादा"    मधुबन


40 वर्ष की अव्यक्त पालना का रिटर्न - 4 बातें - शुभचिंतक बनो, शुभचिंतन करो, शुभ वृत्ति से शुभ वायुमण्डल बनाओ तथा (0) जीरो और हीरो की स्मृति में रहो


वरदान:-
सूक्ष्म संकल्पों के बंधन से भी मुक्त बन ऊंची स्टेज का अनुभव करने वाले निर्बन्धन भव

जो बच्चे जितना निर्बन्धन हैं उतना ऊंची स्टेज पर स्थित रह सकते हैं, इसलिए चेक करो कि मन्सा-वाचा व कर्मणा में कोई सूक्ष्म में भी धागा जुटा हुआ तो नहीं है! एक बाप के सिवाए और कोई याद न आये। अपनी देह भी याद आई तो देह के साथ देह के संबंध, पदार्थ, दुनिया सब एक के पीछे आ जायेंगे। मैं निर्बन्धन हूँ - इस वरदान को स्मृति में रख सारी दुनिया को माया की जाल से मुक्त करने की सेवा करो।

स्लोगन:-
देही-अभिमानी स्थिति द्वारा तन और मन की हलचल को समाप्त करने वाले ही अचल रहते हैं।

ये अव्यक्त इशारे - “निश्चय के फाउण्डेशन को मजबूत कर सदा निर्भय और निश्चिंत रहो"

समस्याओं का काम है आना, निश्चयबुद्धि आत्मा का काम है समाधान स्वरूप से समस्या को परिवर्तन करना। क्यों? आप हर ब्राह्मण आत्मा ने ब्राह्मण जन्म लेते ही माया को चैलेन्ज किया है कि हम मायाजीत बनने वाले हैं। तो समस्या का स्वरूप माया का स्वरूप है। जब चैलेन्ज किया है तो माया सामना तो करेगी लेकिन आप उसे निश्चयबुद्धि विजयी स्वरूप से, नथिंगन्यु समझकर पार कर लो तो बेफिकर बादशाह रहेंगे।