08-06-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - यह सारी विश्व ईश्वरीय फैमिली है इसलिए गाते
हैं तुम मात-पिता हम बालक तेरे, तुम अभी प्रैक्टिकल में गॉडली फैमिली के बने हो''
प्रश्नः-
बाप से 21
जन्मों का पूरा वर्सा लेने की सहज विधि कौन सी है?
उत्तर:-
संगम पर
शिवबाबा को अपना वारिस बनाओ। तन-मन-धन से बलिहार जाओ तो 21 जन्मों के लिए पूरा वर्सा
प्राप्त होगा। बाबा कहे जो बच्चे संगम पर अपना पुराना सब कुछ इनश्योर करते हैं,
उन्हें मैं रिटर्न में 21 जन्मों तक देता हूँ।
गीत:-
नयन हीन को
राह दिखाओ...
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
आत्मा और शरीर दोनों को पावन बनाने के लिए देह सहित जो कुछ है उसे बाप के हवाले कर
उनकी श्रीमत पर चलना है।
2) मात-पिता के गद्दी
नशीन बनने के लिए स्वयं को लायक बनाना है। लायक बनने के लिए मुख्य पवित्रता की धारणा
करनी है।
वरदान:-
संगमयुग पर
अतीन्द्रिय सुख का अनुभव करने वाले डबल प्राप्ति के अधिकारी भव
जो बच्चे संगमयुग पर
अतीन्द्रिय सुख का अनुभव कर लेते हैं उन्हें सदा शान्ति और खुशी की डबल प्राप्ति का
नशा रहता है क्योंकि अतीन्द्रिय सुख में यह दोनों प्राप्तियां समाई हुई हैं। अभी आप
बच्चों को जो बाप और वर्से की प्राप्ति है यह सारे कल्प में नहीं हो सकती। इस समय
की प्राप्ति अतीन्द्रिय सुख और नॉलेज भी फिर कभी नहीं मिल सकती। तो इस डबल प्राप्ति
के अधिकारी बनो।
स्लोगन:-
एक दो के
संस्कारों को जानते हुए उनसे मिलकर चलना - यही उन्नति का साधन है।
मातेश्वरी जी के
अनमोल महावाक्य - “सच्चे पातशाह परमात्मा से सच्चा होकर रहो''
इसी समय अपने को बाप
परमात्मा द्वारा यह फरमान मिला है निरन्तर मेरी याद में रहो। योग का अर्थ है
ईश्वरीय याद में रहना, योग का अर्थ कोई ध्यान नहीं है। अपना यह सहजयोग जो चलते-फिरते,
काम-काज करते उसकी याद में रहना, जिसको ही अटूट अखण्ड योग कहा जाता है, परन्तु इसमें
निरन्तर रहने की प्रैक्टिस की दरकार है। अगर उसके फरमान पर फरमानदार हो नहीं रहेंगे,
कुछ कोताई करेंगे (अवज्ञा करेंगे) तो दण्ड जरूर भोगना पड़ेगा। उनका फरमान है जैसा
कर्म मैं करता हूँ मुझे देख तुम भी फुटस्टेप लो, नहीं तो माया की चोट खायेंगे। सच्चे
पातशाह से सच्चा होकर रहो, जो भी कुछ माया का विघ्न सतावे वो भी इनके आगे रखना
चाहिए, तो उनकी मदद से माया हट जायेगी, रास्ता क्लीयर हो जायेगा, फिर तो जहाँ बिठाये,
जैसा चलाये, जो खिलाये रास्ता क्लीयर हो जायेगा। ऐसा साथ देने की बहुत हिम्मत चाहिए।
ऐसे महान सौभाग्यशाली बिल्कुल थोड़े निकलेंगे, वह विजय माला में जायेंगे। बाकी
भाग्यशाली हैं जो थोड़ा बहुत लेकर जाकर प्रजा बनेंगे, तो थोड़ा मिलने में खुश नहीं
हो जाना। अपनी इच्छा तो सम्पूर्ण हो, साहस रखो आगे बढ़ना है। माया विघ्न डालेगी
परन्तु उसके ऊपर विजय पानी है, इसमें अगर भूल की तो निश्चय की कमी है, कुछ अपनी
धारणा में कमी है यह तो अपना कसूर है, इसमें लोक-लाज़, कुल-मर्यादा को तोड़ना पड़ता
है, जब यह तोड़ेंगे तब ही सच्चे पारलौकिक दैवी मर्यादा को पायेंगे। यह विकारी दुनिया
तो जाने वाली है, देखो मीरा ने भी लोकलाज़ खोई तब गिरधर को पाया। अगर उस लोकलाज़ को
रखेंगे तो इस दैवी लोक के भाती बन नहीं सकेंगे। अब कल्याण अर्थ ईश्वरीय राय तो दी
जाती है, अब यह अपनी बुद्धि का फैसला करना है। क्या करना है, क्या उचित है?
ये अव्यक्त इशारे -
सदा हर्षित रहने के लिए अपनी नेचर को सरल बनाओ, सहनशील बनो।
जो सरलचित हैं वही सदा
हर्षित रहते हैं। हर्षितचित हैं तो सबको आकर्षित करते हैं। हर्षित का अर्थ ही है
अतीन्द्रिय सुख में झूमना। ज्ञान का सुमिरण करते, अव्यक्त स्थिति का अनुभव करते
अतीन्द्रिय सुख में झूमना, इसको कहा जाता है हर्षित। इसके लिए साक्षीपन की सीट पर
सेट रह माया और प्रकृति के पपेटशो को मनोरंजन के रूप से देखो।