08-10-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम्हें अब आवाज से परे जाना है इसलिए मुख
से शिव-शिव कहने की भी दरकार नहीं है''
प्रश्नः-
एक बाप को ही
सर्वशक्तिमान्, ज्ञान का सागर कहेंगे, दूसरों को नहीं - क्यों?
उत्तर:-
क्योंकि एक
बाप को ही याद करने से आत्मा पतित से पावन बन जाती है। बाप ही है जो पतितों को पावन
बना देते हैं, बाकी कोई भी देहधारी मनुष्य पावन बना नहीं सकते। बाप तुम्हें रावण
राज्य से मुक्त कर देते हैं। तुम शिवबाबा से शक्ति लेते हो, जितना जास्ती याद करेंगे
उतना शक्ति मिलेगी और खाद निकलती जायेगी।
गीत:-
ओम् नमो शिवाए...
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
मन्सा, वाचा, कर्मणा किसी को भी दु:ख नहीं देना है। बुरे संस्कारों को निकाल अभी
अच्छे संस्कार धारण करने हैं। कोई विकर्म न हो इसका ध्यान रखना है।
2) इस विचित्र ड्रामा
में अपने श्रेष्ठ भाग्य को देखते हुए अपने आपसे बातें करनी है कि हम भगवान के साथ
पार्टधारी हैं। कितना अच्छा हमारा पार्ट है।
वरदान:-
स्नेह के
रिटर्न में समानता का अनुभव करने वाले सर्वशक्ति सम्पन्न भव
जो बच्चे बाप के
स्नेह में सदा समाये हुए रहते हैं उन्हें स्नेह के रेसपॉन्स में बाप समान बनने का
वरदान प्राप्त हो जाता है। जो सदा स्नेहयुक्त और योगयुक्त हैं वह सर्व शक्तियों से
सम्पन्न स्वत: बन जाते हैं। सर्व शक्तियां सदा साथ हैं तो विजय हुई पड़ी है। जिन्हें
स्मृति रहती कि सर्वशक्तिमान् बाप हमारा साथी है, वह कभी किसी भी बात से विचलित नहीं
हो सकते।
स्लोगन:-
पुरुषार्थी
जीवन में जो सदा सन्तुष्ट और खुश रहने वाले हैं वही खुशनसीब हैं।
ये अव्यक्त इशारे -
परोपकार की भावना से सम्पन्न बन अपकारी पर भी उपकार करो
इस समय ऐसा परोपकारी
ग्रुप चाहिए जो देने वाला दाता हो। जैसे सम्पन्न राजायें सदा प्रजा को देने वाले
होते हैं। सम्पन्न राजाओं का हाथ कभी भी लेने वाला नहीं होगा, देने वाला होगा। आप
बच्चे तो स्वर्ग के विश्व महाराजा बन दाता रूप का पार्ट बजाने वाले हो तो अभी से वही
संस्कार स्वयं में भरो।