09-07-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - वृक्षपति बाप ने तुम बच्चों पर बृहस्पति की दशा बिठाई है, अभी तुम अविनाशी सुख की दुनिया में जा रहे हो''

प्रश्नः-
अविनाशी बृहस्पति की दशा किन बच्चों पर बैठती, उनकी निशानी क्या होगी?

उत्तर:-
जो बच्चे जीते जी देह के सब सम्बन्धों को त्याग अपने को आत्मा निश्चय करते, ऐसे निश्चय आत्मिक बुद्धि वाले बच्चों पर बृहस्पति की दशा बैठती है। उनके ही सुख का गायन है कि अतीन्द्रिय सुख गोप गोपियों से पूछो। उनकी खुशी कभी भी गुम नहीं हो सकती।

गीत:-
ओम् नमो शिवाए...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) अपनी अवस्था की जांच स्वयं ही करनी है। अपने कल्याण के लिए डेली डायरी रखनी है, जिसमें याद का चार्ट नोट करना है।

2) बेहद के बाप से सच्चा-सच्चा व्यापार करना है। अपना तन-मन-धन बाप हवाले कर 21 जन्मों के लिए रिटर्न लेना है। निश्चयबुद्धि बन अपना कल्याण करना है।

वरदान:-
खुशी के साथ शक्ति को धारण कर विघ्नों को पार करने वाले विघ्न जीत भव

जो बच्चे जमा करना जानते हैं वह शक्तिशाली बनते हैं। यदि अभी-अभी कमाया, अभी-अभी बांटा, स्वयं में समाया नहीं तो शक्ति नहीं रहती। सिर्फ बांटने वा दान करने की खुशी रहती है। खुशी के साथ शक्ति हो तो सहज ही विघ्नों को पार कर विघ्न जीत बन जायेंगे। फिर कोई भी विघ्न लगन को डिस्टर्ब नहीं करेंगे। इसलिए जैसे चेहरे से खुशी की झलक दिखाई देती है ऐसे शक्ति की झलक भी दिखाई दे।

स्लोगन:-
परिस्थितियों में घबराने के बजाए उन्हें शिक्षक समझकर पाठ सीख लो।

ये अव्यक्त इशारे - ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो

लास्ट सो फास्ट पुरुषार्थ ज्वाला-रूप का ही रहा हुआ है। पाण्डवों के कारण यादव रूके हुए हैं। पाण्डवों की श्रेष्ठ शान, रुहानी शान की स्थिति यादवों के परेशानी वाली परिस्थिति को समाप्त करेगी। तो अपनी शान से परेशान आत्माओं को शान्ति और चैन का वरदान दो। ज्वाला स्वरूप अर्थात् लाइट हाउस और माइट हाउस स्थिति को समझते हुए इसी पुरुषार्थ में रहो।