09-09-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - योगबल से ही तुम्हें अपने विकर्मों पर जीत पाकर विकर्माजीत बनना है''

प्रश्नः-
कौन सा ख्याल पुरुषार्थी बच्चों को भी पुरुषार्थ हीन बना देता है?

उत्तर:-
अगर किसी पुरुषार्थी को यह ख्याल आया कि अभी तो बहुत समय पड़ा है, पीछे गैलप कर लेंगे। परन्तु बाप समझाते हैं बच्चे मौत का समय निश्चित थोड़ेही है, कल-कल करते मर जायेंगे तो कमाई क्या होगी इसलिए जितना हो सके श्रीमत पर अपना और दूसरों का कल्याण करते रहो। समय का सोचकर पुरुषार्थ-हीन मत बनो।

गीत:-
ओम् नमो शिवाए...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) सच्चा-सच्चा खुदाई खिदमतगार बन सभी रूहों को सैलवेज़ करने की सेवा करनी है। सबका कल्याण करना है। सबको बाप का परिचय देना है।

2) प्यारे ते प्यारी वस्तु (बाप) को प्यार से याद करना है। बने-बनाये ड्रामा पर अटल रहना है। विघ्नों से घबराना नहीं है।

वरदान:-
मनमनाभव की विधि द्वारा मनरस की स्थिति का अनुभव करने और कराने वाले सर्व बन्धनमुक्त भव

जो बच्चे लोहे की जंजीरे और महीन धागों के बंधन को तोड़ बन्धनमुक्त स्थिति में रहते हैं वे कलियुगी स्थूल वस्तुओं की रसना वा मन के लगाव से मुक्त हो जाते हैं। उन्हें देह-अभिमान वा देह के पुरानी दुनिया की कोई भी वस्तु जरा भी आकर्षित नहीं करती। जब कोई भी इन्द्रियों के रस अर्थात् विनाशी रस के तरफ आकर्षण न हो तब अलौकिक अतीन्द्रिय सुख वा मनरस स्थिति का अनुभव होता है। इसके लिए निरन्तर मनमनाभव की स्थिति चाहिए।

स्लोगन:-
सच्ची सेवा वह है जिसमें सर्व की दुआओं के साथ खुशी की अनुभूति हो।

ये अव्यक्त इशारे - अब अपने दाता स्वरूप को प्रत्यक्ष करो

दुनिया में भी दान को पुण्य समझते हैं, आप दाता के बच्चे सदा दान करने वाली पुण्य आत्मायें हो। आप किसी भी आत्मा द्वारा अल्पकाल की प्राप्ति लेने की कामना नहीं कर सकते। यह आत्मा कुछ दे तो मैं दूँ, वा यह भी कुछ करे तो मैं भी करूँ, ऐसी हद की कामना नहीं रखना। दाता के बच्चे बन सबके प्रति स्नेह, सहयोग, शक्ति देने वाले पुण्य आत्मा बनो।