10-06-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - शिवबाबा और ब्रह्मा बाबा दोनों की मत मशहूर
है, तुम्हें दोनों की मत पर चलकर अपना कल्याण करना है''
प्रश्नः-
नम्बरवन
ट्रस्टी कौन है और कैसे?
उत्तर:-
शिवबाबा है
नम्बरवन ट्रस्टी, उसमें बिल्कुल आसक्ति नहीं। भक्ति मार्ग में भी तुम उनके अर्थ जो
भी दान-पुण्य आदि करते हो, वह सब इनश्योर हो जाता है, जिसका फल दूसरे जन्म में मिलता
है। अभी भी जो बाप के अर्थ अपना सब कुछ इनश्योर करते उनका पूरा रिटर्न बाप देता हैं
क्योंकि बाबा कहते - मैं खुद तो सुख भोगता नहीं। मैं तुम्हारा लेकर क्या करूँगा।
गीत:-
दर पर आये हैं
कसम लेके....
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
इस ड्रामा की हर सीन साक्षी होकर देखना है क्योंकि बनी बनाई बन रही। कभी किसी बात
में संशय नहीं उठाना है।
2) बाप इन्श्योरेन्स
मैगनेट है, इसलिए तन-मन-धन बाप की सर्विस में सफल कर अपना भविष्य बनाना है। बाप से
पूरा-पूरा कनेक्शन रखना है। पूरा समाचार देना है।
वरदान:-
मरजीवा स्थिति
द्वारा हिम्मत और हुल्लास की अविनाशी स्टैम्प लगाने वाले प्राप्ति सम्पन्न भव
जो प्राप्तियों से
सम्पन्न होते हैं उनके हर चलन, नैन चैन से उमंग-उत्साह दिखाई देता है। लेकिन हिम्मत
और हुल्लास की अविनाशी स्टैम्प लगाने के लिए अपने पास्ट के वा ईश्वरीय मर्यादाओं के
विपरीत जो संस्कार, स्वभाव, संकल्प वा कर्म होते हैं उनसे मरजीवा बनो। प्रतिज्ञा
रूपी स्वीच को सेट कर प्रैक्टिकल में प्रतिज्ञा प्रमाण चलते रहो। हिम्मत के साथ
हुल्लास हो तो प्राप्ति की झलक दूर से ही दिखाई देगी।
स्लोगन:-
मेले वा झमेले
में डबल लाइट रहने वाला ही धारणामूर्त है।
ये अव्यक्त इशारे -
सदा हर्षित रहने के लिए अपनी नेचर को सरल बनाओ, सहनशील बनो।
आपके हर संकल्प, हर
बोल में विशेषता हो। सदा सरल स्वभाव, सरल बोल, सरलता सम्पन्न कर्म हों, ऐसे सरल
स्वरूप रहो। सदा एक की मत पर, एक से सर्व सम्बन्ध, एक से सर्व प्राप्ति, ऐसे एक
द्वारा सदा एकरस रहने के सहज अभ्यासी रहो। सदा खुश रहो, खुशी का खजाना बांटो। खुशी
की लहर सर्व में फैलाओ, यही सच्ची सेवा है।