10-07-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - बाप आये हैं तुम बच्चों की अविनाशी ज्ञान
रत्नों से झोली भरने, यह एक-एक ज्ञान रत्न लाखों रूपयों का है''
प्रश्नः-
गुप्त दान का
इतना अधिक महत्व क्यों है?
उत्तर:-
क्योंकि बाप
तुम्हें अभी गुप्त ज्ञान रत्नों का दान देते हैं, इसे दुनिया नहीं जानती, फिर तुम
बच्चे इन ज्ञान रत्नों का दान करने से विश्व की राजाई ले लेते हो। यह भी गुप्त है न
कोई लड़ाई, न कोई बारूद आदि, न कोई खर्चा। गुप्त रीति से बाप ने तुम्हें राजाई दान
में दी, इसलिए गुप्त दान का बहुत महत्व है।
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
बाप द्वारा ज्ञान का जो गुप्त दान मिला है, उसकी वैल्यू को समझ अपनी झोली ज्ञान
रत्नों से भरपूर करनी है। सबको गुप्त दान देते जाना है।
2) इस कयामत के समय
जबकि वापिस जाना है तो अपना सब कुछ सफल करना है। प्रीत बुद्धि बनना है। मुक्ति और
जीवनमुक्ति का रास्ता सबको बताना है।
वरदान:-
भोलेपन के साथ
ऑलमाइटी अथॉरिटी बन माया का सामना करने वाले शक्ति स्वरूप भव
कभी-कभी भोलापन बहुत
भारी नुकसान कर देता है। सरलता, भोला रूप धारण कर लेती है। लेकिन ऐसा भोला नहीं बनो
जो सामना नहीं कर सको। सरलता के साथ समाने और सहन करने की शक्ति चाहिए। जैसे बाप
भोलानाथ के साथ आलमाइटी अथॉरिटी है, ऐसे आप भी भोलेपन के साथ-साथ शक्ति स्वरूप भी
बनो तो माया का गोला नहीं लगेगा, माया सामना करने के बजाए नमस्कार कर लेगी।
स्लोगन:-
अपने दिल में
याद का झण्डा लहराओ तो प्रत्यक्षता का झण्डा लहरा जायेगा।
ये अव्यक्त इशारे -
ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो
विशेष याद की यात्रा
को पॉवरफुल बनाओ, ज्ञान-स्वरूप के अनुभवी बनो। आप श्रेष्ठ आत्माओं की शुभ वृत्ति व
कल्याण की वृत्ति और शक्तिशाली वातावरण अनेक तड़पती हुई, भटकती हुई, पुकार करने वाली
आत्माओं को आनन्द, शान्ति और शक्ति की अनुभूति करायेगी।