11-09-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - इस अन्तिम जन्म में गृहस्थ व्यवहार में रहते
कमल फूल समान पवित्र बनो, एक बाप को याद करो, यही गुप्त मेहनत है''
प्रश्नः-
ज्ञान का तीसरा
नेत्र मिलते ही कौन सा कान्ट्रास्ट स्पष्ट अनुभव होता है?
उत्तर:-
भक्ति में
भगवान को पाने के लिए कितना दर-दर भटक रहे थे, कितनी ठोकरें खा रहे थे। अभी हमें वह
मिल गया। 2- साथ-साथ रहम आता मनुष्य बिचारे अभी तक भी भटक रहे हैं, रास्ता ढूँढ रहे
हैं। बाबा ने हमें भटकने से छुड़ा दिया। हम बाबा के साथ जाने की तैयारी कर रहे हैं।
गीत:-
आज अन्धेरे
में हैं इंसान...
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
अविनाशी ड्रामा के राज़ को बुद्धि में रख किसी को भी दोषी नहीं बनाना है।
पुरुषोत्तम बनने का पुरुषार्थ करना है। इस थोड़े समय में बाप से पूरा वर्सा लेना
है।
2) डबल अहिंसक बनने
के लिए कभी किसी पर क्रोध नहीं करना है। विकारों का दान दे सर्व-गुण सम्पन्न बनने
का पुरुषार्थ करना है।
वरदान:-
सेकण्ड में
सर्व कमजोरियों से मुक्ति प्राप्त कर मर्यादा पुरषोत्तम बनने वाले सदा स्नेही भव
जैसे स्नेही स्नेह
में आकर अपना सब कुछ न्यौछावर वा अर्पण कर देते हैं। स्नेही को कुछ भी समर्पण करने
के लिए सोचना नहीं पड़ता। तो जो भी मर्यादायें वा नियम सुनते हो उन्हें प्रैक्टिकल
में लाने अथवा सर्व कमजोरियों से मुक्ति प्राप्त करने की सहज युक्ति है - सदा एक
बाप के स्नेही बनो। जिसके स्नेही हो, निरन्तर उसके संग में रहो तो रूहानियत का रंग
लग जायेगा और एक सेकण्ड में मर्यादा पुरषोत्तम बन जायेंगे क्योंकि स्नेही को बाप का
सहयोग स्वत: मिल जाता है।
स्लोगन:-
निश्चय का
फाउण्डेशन मजबूत है तो सम्पूर्णता तक पहुंचना निश्चित है।
अव्यक्त इशारे - अब
अपने दाता स्वरूप को प्रत्यक्ष करो
वर्तमान समय सर्व
आत्मायें भिखारी के रूप में भगवान से कुछ न कुछ मांग रही हैं। सभी के मुख में वा मन
में यही रहता कि यह दे दो। कोई धन के भिखारी हैं, कोई सहयोग के, कोई सम्बन्ध के,
कोई थोड़े समय के लिए सुख-चैन के, कोई आराम वा नींद के, कोई फालोअर्स के भिखारी
हैं, आप दाता के बच्चे मास्टर दाता बन अपनी शुभ भावना की वृत्तियों से भिखारी
आत्माओं की भूख मिटाओ।