11-10-2026     प्रात:मुरली  ओम् शान्ति 18.01.2012 "बापदादा"    मधुबन


सेवाओं के साथ-साथ एक दो के सहयोगी बन वायुमण्डल में तीव्र पुरुषार्थ की लहर फैलाओ, मनजीत बन आत्माओं की मन्सा सेवा करो


वरदान:-
स्वमान की सीट पर स्थित रह माया को सरेण्डर कराने वाले श्रेष्ठ स्वमानधारी भव

संगमयुग का सबसे श्रेष्ठ स्वमान है मास्टर सर्वशक्तिमान की स्मृति में रहना। जैसे कोई बड़ा आफीसर वा राजा जब स्वमान की सीट पर स्थित होता है तो दूसरे भी उसे सम्मान देते हैं, अगर स्वयं सीट पर नहीं तो उसका आर्डर कोई नहीं मानेंगे, ऐसे आप भी स्वमानधारी बन अपने श्रेष्ठ स्वमान की सीट पर सेट रहो तो माया आपके आगे सरेण्डर हो जायेगी।

स्लोगन:-
साक्षीपन की स्थि ति में रह दिलाराम के साथ का अनुभव करने वाले ही लवलीन आत्मा हैं।

ये अव्यक्त इशारे - परोपकार की भावना से सम्पन्न बन अपकारी पर भी उपकार करो

अपकारी पर भी उपकार करना, यही ज्ञानी तू आत्मा का कर्तव्य है। जैसे बाप ने ग्लानि को भी कल्याणकारी दृष्टि से देखा। उपकारी पर उपकार तो दुनिया वाले भी करते हैं, भक्त आत्मायें भी करते हैं लेकिन ज्ञानी तू आत्मा का अर्थ है सर्व के प्रति कल्याण की भावना, अकल्याण संकल्प मात्र भी नहीं हो। अपकारियों पर भी उपकार करे तब कहेंगे विश्व कल्याणकारी।