13-01-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - बाप की श्रीमत का रिगार्ड रखना माना मुरली कभी भी मिस नहीं करना, हर आज्ञा का पालन करना''

प्रश्नः-
अगर तुम बच्चों से कोई पूछे राज़ी-खुशी हो? तो तुम्हें कौन-सा जवाब फ़लक से देना चाहिए?

उत्तर:-
बोलो - परवाह थी पार ब्रह्म में रहने वाले की, वह मिल गया, बाकी क्या चाहिए। पाना था सो पा लिया.....। तुम ईश्वरीय बच्चों को किसी बात की परवाह नहीं। तुम्हें बाप ने अपना बनाया, तुम्हारे पर ताज रखा फिर परवाह किस बात की।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) सदा राज़ी-खुशी रहने के लिए बाप की याद में रहना है। पढ़ाई से अपने ऊपर राजाई का ताज रखना है।

2) श्रीमत पर भारत को स्वर्ग बनाने की सेवा करनी है। सदा श्रीमत का रिगार्ड रखना है।

वरदान:-
श्रेष्ठ तकदीर की स्मृति द्वारा अपने समर्थ स्वरुप में रहने वाले सूर्यवंशी पद के अधिकारी भव

जो अपनी श्रेष्ठ तकदीर को सदा स्मृति में रखते हैं वह समर्थ स्वरुप में रहते हैं। उन्हें सदा अपना अनादि असली स्वरुप स्मृति में रहता है। कभी नकली फेस धारण नहीं करते। कई बार माया नकली गुण और कर्तव्य का स्वरुप बना देती है। किसको क्रोधी, किसको लोभी, किसको दु:खी, किसको अशान्त बना देती है - लेकिन असली स्वरुप इन सब बातों से परे है। जो बच्चे अपने असली स्वरुप में स्थित रहते हैं वह सूर्यवंशी पद के अधिकारी बन जाते हैं।

स्लोगन:-
सर्व पर रहम करने वाले बनो तो अहम् और वहम् समाप्त हो जायेगा।

अव्यक्त इशारे - इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो

जब आपकी रचना कमल पुष्प जल में रहते जल के बन्धन से मुक्त है। तो जब रचना में यह विशेषता है तो क्या मास्टर रचता में नहीं हो सकती? जब कभी बंधन में फंस जाओ तो अपने सामने कमल पुष्प का दृष्टान्त रखो कि जब कमल पुष्प न्यारा-प्यारा बन सकता है तो क्या मास्टर सर्वशक्तिवान नहीं बन सकते! तो सदा बन जायेंगे।