13-03-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम्हें श्रीमत पर तत्वों सहित सारी दुनिया को पावन बनाने की सेवा करनी है, सबको सुख और शान्ति का रास्ता बताना है''

प्रश्नः-
तुम बच्चे अपनी देह को भी भूलने का पुरुषार्थ करते हो इसलिए तुम्हें किस चीज़ की दरकार नहीं हैं?

उत्तर:-
चित्रों की। जब यह चित्र (देह) ही भूलना है तो उन चित्रों की क्या दरकार है। स्वयं को आत्मा समझ विदेही बाप को ओर स्वीट होम को याद करो। यह चित्र तो हैं छोटे बच्चों के लिए अर्थात् नयों के लिए। तुम्हें तो याद में रहना है और सबको याद कराना है। धंधा आदि करते सतोप्रधान बनने के लिए याद में ही रहने का अभ्यास करो।

गीत:-
तकदीर जगाकर आई हूँ........

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) बाप समान महिमा योग्य बनने के लिए फालो फादर करना है।

2) यह अन्तिम जन्म है, अब घर जाना है इसलिए खुशी में अन्दर ही अन्दर नगाड़े बजते रहें। कर्मभोग को कर्मयोग से अर्थात् बाप की याद से खुशी-खुशी चुक्तू करना है।

वरदान:-
बालक सो मालिकपन की स्मृति से सर्व खजानों के अधिकारी, प्राप्ति सम्पन्न भव

हम बाप के सर्व खजानों के बालक सो मालिक हैं, नेचरल योगी, नेचरल स्वराज्य अधिकारी हैं। इस स्मृति से सर्व प्राप्ति सम्पन्न बनो। यही गीत सदा गाते रहो कि “पाना था सो पा लिया।'' खोया-पाया, खोया-पाया यह खेल नहीं करो। पा रहा हूँ, पा रहा हूँ - यह अधिकारी के बोल नहीं। जो सम्पन्न बाप के बालक, सागर के बच्चे हैं वह नौकर के समान मेहनत कर नहीं सकते।

स्लोगन:-
योगबल द्वारा कर्मभोग पर विजय प्राप्त करना - यही श्रेष्ठ पुरुषार्थ है।

ये अव्यक्त इशारे- “निश्चय के फाउण्डेशन को मजबूत कर सदा निर्भय और निश्चिंत रहो"

सबसे पहले स्वयं में पूरा फेथ (विश्वास) चाहिए फिर बाप-दादा और सर्व परिवार की आत्माओं में फेथफुल होना पड़ता है। जितना फेथफुल बनकर, निश्चयबुद्धि होकर कोई कर्तव्य करेंगे तो फेथफुल होने से सक्सेसफुल हो ही जायेंगे। फेथफुल होने से हर कर्तव्य, हर संकल्प, हर बोल पावरफुल होगा।