13-07-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम बाप के पास आये हो अपनी जीवन हीरे समान
बनाने, बाप की याद से ही ऐसी जीवन बनेगी''
प्रश्नः-
नई दुनिया में
ऊंच पद के लिए कौन सा एक मुख्य पुरुषार्थ करना है?
उत्तर:-
बाबा कहते -
मीठे बच्चे, जिन पुराने सम्बन्धियों ने इतना दु:खी किया, अब उनके मोहजाल से बुद्धि
को निकाल एक मुझे याद करो। उनके साथ रहते भी मन को मेरे में लगाओ। मनमनाभव का
मन्त्र सदा याद रखो तो तुम नई दुनिया में ऊंच पद पायेंगे।
गीत:-
तूने रात
गँवाई...
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
राजाई पद पाने के लिए बाप पर पूरा-पूरा बलिहार जाना है। तन-मन-धन सब समर्पण कर
ट्रस्टी होकर रहना है। विकर्माजीत बनने का पुरुषार्थ करना है।
2) याद में ही कमाई
है, इसलिए निरन्तर याद में रहने का पुरुषार्थ करना है। ऐसा रूहानी फूल बनना है जो
फूलों की दुनिया का अधिकारी बन जायें। अन्दर में कोई भी कांटा न रहे।
वरदान:-
एक बाप में
सारे संसार का अनुभव करने वाले बेहद के वैरागी भव
बेहद के वैरागी वही
बन सकते जो बाप को ही अपना संसार समझते हैं। जिनका बाप ही संसार है वह अपने संसार
में ही रहेंगे, दूसरे में जायेंगे ही नहीं तो किनारा स्वत: हो जायेगा। संसार में
व्यक्ति और वैभव सब आ जाता है। बाप की सम्पत्ति सो अपनी सम्पत्ति - इसी स्मृति में
रहने से बेहद के वैरागी हो जायेंगे। कोई को देखते हुए भी नहीं देखेंगे। दिखाई ही नहीं
देंगे।
स्लोगन:-
पावरफुल स्थिति
का अनुभव करने के लिए एकान्त और रमणीकता का बैलेन्स रखो।
ये अव्यक्त इशारे -
ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो
जैसे किला बांधा जाता
है, जिससे प्रजा किले के अन्दर सेफ रहे। एक राजा के लिए कोठरी नहीं बनाते, किला
बनाते हैं। आप सभी भी स्वयं के लिए, साथियों के लिए, अन्य आत्माओं के लिए ज्वाला
रूप याद का किला बांधो। याद के शक्ति की ज्वाला हो तो हर आत्मा सेफ्टी का अनुभव
करेगी।