14-01-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - कदम-कदम बाप की श्रीमत पर चलते रहो, एक बाप से ही सुनो तो माया का वार नहीं होगा''

प्रश्नः-
ऊंच पद प्राप्त करने का आधार क्या है?

उत्तर:-
ऊंच पद प्राप्त करने के लिए बाप के हर डायरेक्शन पर चलते रहो। बाप का डायरेक्शन मिला और बच्चों ने माना। दूसरा कोई संकल्प तक भी न आये। 2- इस रूहानी सर्विस में लग जाओ। तुम्हें और कोई की याद नहीं आनी चाहिए। आप मुये मर गई दुनिया तब ऊंच पद मिल सकता है।

गीत:-
तुम्हें पाके हमने........

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) माया पहलवान बन सामने आयेगी, उससे डरना नहीं है। मायाजीत बनना है। कदम-कदम श्रीमत पर चल अपने ऊपर आपेही कृपा करनी है।

2) बाप को अपना सच्चा-सच्चा पोतामेल बताना है। ट्रस्टी होकर रहना है। चलते-फिरते याद का अभ्यास करना है।

वरदान:-
रूहे गुलाब बन दूर-दूर तक रूहानी खुशबू फैलाने वाले रूहानी सेवाधारी भव

रूहानी रूहे गुलाब अपनी रूहानी वृत्ति द्वारा रूहानियत की खुशबू दूर-दूर तक फैलाते हैं। उनकी दृष्टि में सदा सुप्रीम रूह समाया हुआ रहता है। वे सदा रूह को देखते, रूह से बोलते। मैं रूह हूँ, सदा सुप्रीम रूह की छत्र-छाया में चल रहा हूँ, मुझ रूह का करावनहार सुप्रीम रूह है, ऐसे हर सेकेण्ड हजूर को हाजिर अनुभव करने वाले सदा रूहानी खुशबू में अविनाशी और एकरस रहते हैं। यही है रूहानी सेवाधारी की नम्बरवन विशेषता।

स्लोगन:-
निर्विघ्न बन सेवा में आगे नम्बर लेना अर्थात् नम्बरवन भाग्यशाली बनना।

अव्यक्त इशारे - इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो

ब्राह्मण जीवन में देह का बंधन, संबंध का बंधन, साधनों का बंधन - सब खत्म हो गया ना! कोई बंधन नहीं। बंधन अपने वश में करता है और संबंध स्नेह का सहयोग देता है। तो देह के सम्बन्धियों का देह के नाते से सम्बन्ध नहीं लेकिन आत्मिक संबंध है। ऐसे ब्राह्मण अर्थात् जीवन-मुक्त।