17-01-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - जब यह भारत स्वर्ग था तब तुम घोर सोझरे में थे, अभी अन्धियारा है, फिर सोझरे में चलो''

प्रश्नः-
बाप अपने बच्चों को कौन सी एक कहानी सुनाने आये हैं?

उत्तर:-
बाबा कहते मीठे बच्चे - मैं तुम्हें 84 जन्मों की कहानी सुनाता हूँ। तुम जब पहले-पहले जन्म में थे तो एक ही दैवी धर्म था फिर तुमने ही दो युग के बाद बड़े-बड़े मन्दिर बनाये हैं। भक्ति शुरू की है। अभी तुम्हारा यह अन्त के भी अन्त का जन्म है। तुमने पुकारा दु:ख हर्ता सुख कर्ता आओ.... अब मैं आया हूँ।

गीत:-
आज अन्धेरे में है इन्सान........

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) आत्मा से बुरे संस्कारों को निकालने के लिए देही-अभिमानी रहने का अभ्यास करना है। यह अन्तिम 84 वां जन्म है, वानप्रस्थ अवस्था है इसलिए पुण्य आत्मा बनने की मेहनत करनी है।

2) देह के सब सम्बन्धों को छोड़ एक बाप को और राजाई को याद करना है, बीज और झाड़ का ज्ञान सिमरण कर सदा हर्षित रहना है।

वरदान:-
उपराम और एवररेडी बन बुद्धि द्वारा अशरीरी पन का अभ्यास करने वाले सर्व कलाओं में सम्पन्न भव

जैसे सर्कस में कला दिखाने वाले कलाबाज का हर कर्म कला बन जाता है। वे कलाबाज शरीर के कोई भी अंग को जैसे चाहें, जहाँ चाहें, जितना समय चाहें मोल्ड कर सकते हैं, यही कला है। आप बच्चे बुद्धि को जब चाहो जितना समय, जहाँ स्थित करने चाहो वहाँ स्थित कर लो - यही सबसे बड़ी कला है। इस एक कला से 16 कला सम्पन्न बन जायेंगे। इसके लिए ऐसे उपराम और एवररेडी बनो जो आर्डर प्रमाण एक सेकण्ड में अशरीरी बन जाओ। युद्ध में समय न जाये।

स्लोगन:-
सरलता और सहनशीलता के गुण को धारण करने वाले हीसच्चे स्नेही और सहयोगी हैं।

अव्यक्त इशारे - इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो

जो परमात्म ज्ञानी बच्चे हैं, उन्हें ज्ञान का फल मुक्ति और जीवनमुक्ति का वर्सा संगम पर ही प्राप्त होता है। ज्ञान अर्थात् समझ। समझदार हर कर्म करते हुए सदा स्वयं को बन्धनमुक्त, सर्व आकर्षणों से मुक्त बनाने की समझ रखता है। उनके हर संकल्प, बोल, कर्म, सम्बन्ध और सम्पर्क में मुक्ति-जीवनमक्ति की स्टेज रहती है, जिसको न्यारा और प्यारा कहते हैं।