18-06-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - अतीन्द्रिय सुख का अनुभव करने के लिए सदा इसी स्मृति में रहो कि हम किसके बच्चे हैं, अगर बाप को भूले तो सुख गुम हो जायेगा''

प्रश्नः-
बाप के मिलने की स्थाई खुशी किन बच्चों को रहती है?

उत्तर:-
जिन बच्चों ने एक से अपने सर्व सम्बन्ध जोड़े हैं, जो एक बाप की याद में रहने की ही मेहनत करते हैं, किसी देहधारी को याद नहीं करते उन्हें ही स्थाई खुशी रहती है। अगर देहधारी की याद है तो बहुत रोना पड़ेगा। विश्व का मालिक बनने वाले कभी रोते नहीं।

गीत:-
बचपन के दिन भुला न देना........

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) कभी भी किसी बात में छुई-मुई नहीं बनना है। ईश्वरीय बचपन को भूल मुरझाना नहीं है। इन आंखों से जो कुछ दिखाई देता है, उसे देखते भी नहीं देखना है।

2) एक बाप की याद में ही कमाई है इसलिए देहधारियों को याद कर रोना नहीं है। बाप और वर्से को याद कर विश्व की बादशाही लेनी है।

वरदान:-
श्रेष्ठ मत के आधार पर मायावी संगदोष से परे रहने वाले शक्ति स्वरूप भव

बच्चों की एक कम्पलेन रहती है कि सम्बन्धी नहीं सुनते, संग अच्छा नहीं है, इस कारण शक्तिशाली नहीं बन सकते। लेकिन श्रेष्ठ मत के आधार पर ज्ञान स्वरूप, शक्ति स्वरूप के वरदानी बन अपनी स्थिति को अचल बनाओ। साक्षी होकर हर एक का पार्ट देखो। अपने सतोगुणी पार्ट में स्थित रहो। सदा बाप के संग में रहो तो तमोगुणी आत्मा के संग के रंग का प्रभाव पड़ नहीं सकता।

स्लोगन:-
कर्मयोगी वह है जो कर्म के कल्प वृक्ष की डाली पर बैठ कर्म करते भी उपराम स्थिति में रहे।

ये अव्यक्त इशारे - सदा हर्षित रहने के लिए अपनी नेचर को सरल बनाओ, सहनशील बनो।

जैसे काई की विशेष नेचर होती है, उस नेचर के वश न चाहते भी चलते रहते हैं। कहते हैं चाहती नहीं हूँ लेकिन मेरी यह नेचर है। ऐसे आप बच्चों की सरल नेचर हो जो सबको अनुभव हो कि यह सहज योगी, स्वत: योगी हैं। क्या करूँ, कैसे योग लगाऊं .. यह बातें खत्म। हैं ही सदा सहयोगी अर्थात् योगी। इसी एक बात को नेचर और नैचुरल करने से सभी सबजेक्ट में परफेक्ट हो जायेंगे।