19-06-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - शिवबाबा तुम्हारे फूल आदि स्वीकार नहीं कर सकते क्योंकि वह पूज्य वा पुजारी नहीं बनते, तुम्हें भी संगम पर फूल हार नहीं पहनने हैं''

प्रश्नः-
भविष्य राज्य तख्त के अधिकारी कौन बनते हैं?

उत्तर:-
जो अभी मात-पिता के दिलतख्त को जीतने वाले हैं, वही भविष्य तख्तनशीन बनते हैं। वन्डर है बच्चे मात-पिता पर भी विजय प्राप्त करते हैं। मेहनत कर मात-पिता से भी आगे जाते हैं।

गीत:-
छोड़ भी दे आकाश सिंहासन...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) बाप के दिल रूपी तख्त पर जीत पाने का पुरुषार्थ करना है। परिवार में ट्रस्टी रहकर प्यार से सबको चलाना है। मोहजीत बनना है।

2) योगबल से आत्मा को स्वच्छ बनाना है। इन आंखों से सब कुछ देखते हुए याद एक बाप को करना है। यहाँ फूल हार स्वीकार न कर खुशबूदार फूल बनना है

वरदान:-
प्रालब्ध की इच्छा को त्याग अच्छा पुरुषार्थ करने वाले श्रेष्ठ पुरुषार्थी भव

श्रेष्ठ पुरुषार्थी उन्हें कहा जाता है जो पुरुषार्थ की प्रालब्ध को भोगने की इच्छा नहीं रखते। जहाँ इच्छा है वहाँ स्वच्छता खत्म हो जाती है और सोचता (सोचने वाले) बन जाते हैं। जो यहाँ ही प्रालब्ध भोगने की इच्छा रखते हैं वह अपनी भविष्य कमाई जमा होने में कमी कर देते हैं इसलिए इच्छा के बजाए अच्छा शब्द याद रखो। श्रेष्ठ पुरुषार्थी सदा फ्लोलेस बनने का पुरुषार्थ करते हैं, किसी भी बात में फेल नहीं होते।

स्लोगन:-
साधन कमल पुष्प बनकर यूज़ करो क्योंकि ये आपके कर्मयोग का फल हैं।

ये अव्यक्त इशारे - सदा हर्षित रहने के लिए अपनी नेचर को सरल बनाओ, सहनशील बनो।

सर्वस्व त्यागी बच्चों में मुख्य सरलता और सहनशीलता का गुण अवश्य होगा। ऐसे बच्चे स्वयं हर्षित रहते और सर्व को आकर्षित करते हैं। वे एक दो के स्नेही बन जाते हैं। अगर सरलता नहीं तो स्नेह भी नहीं हो सकता। जैसे साकार रूप में देखा जितना ही नॉलेजफुल उतना ही सरल स्वभाव। बुजुर्ग का बुजुर्ग, बचपन का बचपन।