19-07-2024        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम्हें डबल सिरताज राजा बनना है तो खूब सर्विस करो, प्रजा बनाओ, संगम पर तुम्हें सर्विस ही करनी है, इसमें ही कल्याण है''

प्रश्नः-
पुरानी दुनिया के विनाश के पहले हरेक को कौन-सा श्रृंगार करना है?

उत्तर:-
तुम बच्चे योगबल से अपना श्रृंगार करो, इस योगबल से ही सारा विश्व पावन बनेगा। तुमको अब वानप्रस्थ में जाना है इसलिए इस शरीर का श्रृंगार करने की जरूरत नहीं। यह तो वर्थ नाट पेनी है, इससे ममत्व निकाल दो। विनाश के पहले बाप समान रहमदिल बन अपना और दूसरों का श्रृंगार करो। अन्धों की लाठी बनो।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) अमरलोक में जाने के लिए संगम पर खुशी का खजाना भरना है। टाइम वेस्ट नहीं करना है। अपनी झोली भर-कर रहमदिल बन अंधों की लाठी बनना है।

2) हथेली पर बहिश्त लेने के लिए पवित्र जरूर बनना है। स्वयं को सतोप्रधान बनाने की युक्तियां रच अपने ऊपर आपेही कृपा करनी है। योगबल जमा करना है।

वरदान:-
हज़ूर को सदा साथ रख कम्बाइन्ड स्वरूप का अनुभव करने वाले विशेष पार्टधारी भव

बच्चे जब दिल से कहते हैं बाबा तो दिलाराम हाज़िर हो जाता है, इसीलिए कहते हैं हजूर हाज़िर है। और विशेष आत्मायें तो हैं ही कम्बाइन्ड। लोग कहते हैं जिधर देखते हैं उधर तू ही तू है और बच्चे कहते हैं हम जो भी करते हैं, जहाँ भी जाते हैं बाप साथ ही है। कहा जाता है करनकरावनहार, तो करनहार और करावनहार कम्बाइन्ड हो गया। इस स्मृति में रहकर पार्ट बजाने वाले विशेष पार्टधारी बन जाते हैं।

स्लोगन:-
स्वयं को इस पुरानी दुनिया में गेस्ट समझकर रहो तो पुराने संस्कारों और संकल्पों को गेट आउट कर सकेंगे।