19-08-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम्हें अभी रूहानी कारोबार करनी है, रूह समझकर हर कर्म करने से आत्मा निर्विकारी बनती जाती है''

प्रश्नः-
स्वर्ग का वर्सा लेने और स्वर्ग में ऊंच पद पाने का आधार क्या है?

उत्तर:-
ब्रह्माकुमार/कुमारी बनें तो स्वर्ग का वर्सा मिल जायेगा। परन्तु ऊंच पद का आधार है पढ़ाई। अगर बाप का बनकर अच्छी रीति पढ़ाई पढ़ते रहें, पूरा पवित्र बनें तो राजाई पद मिलता है। कोई पूरा पढ़ते नहीं, कर्मबन्धन है, पूरा पवित्र नहीं बने और शरीर छूट गया तो प्रजा में भी साधारण पद पा लेंगे।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) योग द्वारा कर्मबन्धन का हिसाब-किताब चुक्तू कर, पावन बनना है। ज्ञान-चिता पर बैठना है। पूरा-पूरा वैष्णव अर्थात् पवित्र बनना है।

2) अपने शान्त स्वधर्म में स्थित रहना है। सबको शान्तिधाम की याद दिलानी है। कभी भी अशान्त नहीं होना है।

वरदान:-
आवाज से परे की स्थिति में स्थित हो सर्व गुणों का अनुभव करने वाले मा. बीजरूप भव

जैसे बीज में सारा वृक्ष समाया हुआ होता है वैसे ही आवाज से परे की स्थिति में संगमयुग के सर्व विशेष गुण अनुभव में आते हैं। मास्टर बीजरूप बनना अर्थात् सिर्फ शान्ति नहीं लेकिन शान्ति के साथ ज्ञान, अतीन्द्रिय सुख, प्रेम, आनंद, शक्ति आदि-आदि सर्व मुख्य गुणों का अनुभव करना। यह अनुभव सिर्फ स्वयं को नहीं होता लेकिन अन्य आत्मायें भी उनके चेहरे से सर्वगुणों का अनुभव करती हैं। एक गुण में सर्वगुण समाये हुए रहते हैं।

स्लोगन:-
अच्छाई धारण करो लेकिन अच्छाई में प्रभावित नहीं हो जाओ।

ये अव्यक्त इशारे - अपवित्रता के बीज को भी समाप्त कर सम्पूर्ण स्वच्छ (पवित्र) बनो

पवित्रता आप ब्राह्मण आत्माओं का अनादि आदि संस्कार है, इस नैचुरल संस्कार से स्वप्न व संकल्प में भी अपवित्रता इमर्ज न हो। संकल्प आवे और विजयी बनो, इनसे भी ऊपर नैचुरल संस्कार बना लो। तो इस सबजेक्ट में पुरुषार्थ करने की आवश्यकता नहीं रहेगी।