20-06-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम्हारे पास अविनाशी ज्ञान रत्नों का अथाह
खजाना है, तुम उसका दान करो, तुम्हारे दर से कोई भी वापिस नहीं जाना चाहिए''
प्रश्नः-
सर्व सम्बन्धों
की सैक्रीन बाप अपने बच्चों को कौन सी श्रीमत देते हैं?
उत्तर:-
मीठे बच्चे -
अपना बुद्धियोग सब तरफ से हटाए एक मुझे याद करते रहो। दुनिया की कोई भी वस्तु,
मित्र सम्बन्धी आदि याद न आयें क्योंकि इस समय सब दु:ख देने वाले हैं। विश्व का
मालिक बनना है तो जरूर 63 जन्मों का हिसाब-किताब चुक्तू करने की मेहनत करनी पड़े।
सब कुछ भूल अशरीरी बनो तब हिसाब-किताब चुक्तू हो। मैं सर्व संबंधों की सैक्रीन हूँ।
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
बाप ने जो अथाह ज्ञान का धन दिया है, उसे धारण कर स्वयं भी साहूकार बनना है और सबको
दान भी करना है। जो भी आये उसकी झोली भर देनी है।
2) बाप की याद से ही
कल्याण होना है, इसलिए जितना हो सके चलते-फिरते बाप की याद में रहना है। सर्व
सम्बन्धों की रसना एक बाप से लेनी है।
वरदान:-
सदा बिजी रहने
की विधि द्वारा व्यर्थ संकल्पों की कम्पलेन को समाप्त करने वाले सम्पूर्ण कर्मातीत
भव
सम्पूर्ण कर्मातीत
बनने में व्यर्थ संकल्पों के तूफान ही विघ्न डालते हैं। इस व्यर्थ संकल्पों की
कम्पलेन को समाप्त करने के लिए अपने मन को हर समय बिजी रखो, समय की बुकिंग करने का
तरीका सीखो। सारे दिन में मन को कहाँ-कहाँ बिजी रखना है - यह प्रोग्राम बनाओ। रोज
अपने मन को 4 बातों में बिजी कर दो: 1-मिलन (रूहरिहान) 2-वर्णन (सर्विस) 3-मगन और
4-लगन। इससे समय सफल हो जायेगा और व्यर्थ की कम्पलेन खत्म हो जायेगी।
स्लोगन:-
सफलता को
परमात्म बर्थराइट समझने वाले ही सदा प्रसन्नचित रह सकते हैं।
ये अव्यक्त इशारे -
सदा हर्षित रहने के लिए अपनी नेचर को सरल बनाओ, सहनशील बनो।
सरलता लाने के लिए
सिर्फ एक बात ध्यान पर जरूर रखनी है। अपनी स्थिति स्तुति के आधार पर न हो। कई बच्चे
कर्तव्य के फल की इच्छा ज्यादा रखते हैं इसलिए जब स्तुति नहीं होती तो स्थिति हलचल
में आ जाती हैं। निंदा होती है तो निधनके बन जाते हैं। अपनी स्टेज को छोड़ धनी को
भी भूल जाते हैं इसलिए स्तुति के आधार पर स्थिति नहीं रखना।