21-06-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति 15.11.2010 "बापदादा" मधुबन
स्व-परिवर्तन की गति
को तीव्र कर संस्कार-स्वभाव के समाप्ति का समारोह मनाओ, हर संकल्प, बोल और कर्म में
ब्रह्मा बाप को कापी करो
वरदान:-
सम्पूर्ण
समर्पण की विधि द्वारा अपने पन का अधिकार समाप्त करने वाले समान साथी भव
जो वायदा है कि साथ
रहेंगे, साथ चलेंगे और साथ में राज्य करेंगे - इस वायदे को तभी निभा सकेंगे जब साथी
के समान बनेंगे। समानता आयेगी समर्पणता से। जब सब कुछ समर्पण कर दिया तो अपना वा
अन्य का अधिकार समाप्त हो जाता है। जब तक किसी का भी अधिकार है तो सर्व समर्पण में
कमी है इसलिए समान नहीं बन सकते। तो साथ रहने, साथ उड़ने के लिए जल्दी-जल्दी समान
बनो।
स्लोगन:-
अपने समय, श्वांस और संकल्प को सफल करना ही सफलता का आधार है।
ये अव्यक्त इशारे -
सदा हर्षित रहने के लिए अपनी नेचर को सरल बनाओ, सहनशील बनो।
जो सरल स्वभाव वाले
होंगे उसमें समेटने की शक्ति स्वत: होगी। सरल स्वभाव वाला सभी का सहयोगी और स्नेही
भी होगा और जितना सरल स्वभाव वाला होगा उतना माया कम सामना करेगी। सरल स्वभाव वाले
का व्यर्थ संकल्प नहीं चलता। उसका समय भी व्यर्थ नहीं जाता। उनकी बुद्धि विशाल और
दूरांदेशी रहती है, इसलिए उनके आगे कोई भी समस्या सामना नहीं कर सकती।
विशेष सूचना - मास के
तीसरे रविवार का योग अभ्यास
आज मास का तीसरा
रविवार है, सभी भाई बहिनें संगठित रूप में एकत्रित होकर सायं 6.30 से 7.30 बजे तक
अपने फरिश्ते स्वरूप द्वारा भटकती हुई दु:खी अशान्त आत्माओं को सुख शान्ति की
पवित्र किरणें देकर उन्हें सहारे दाता परमात्मा बाप की स्मृति दिलाने की सेवा करें।