22-06-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - बाप आये हैं तुम बच्चों की खिदमत (सेवा) करने, तुम भी बाप समान बन सबकी खिदमत (सेवा) करो''

प्रश्नः-
ब्रह्मा बाप का कौन सा एक विचार चलता, जिस पर शिवबाबा कहते वेट एण्ड सी, फिकर मत करो?

उत्तर:-
बाबा का विचार चलता, समय बड़ा नाज़ुक होता जाता, बच्चों को अविनाशी ज्ञान रत्न लेने बाप के पास आना ही है, इतने ढेर बच्चे कहाँ आकर रहेंगे। कितने मकान बनाने पड़ेंगे। शिवबाबा कहते वेट एण्ड सी। कल्प पहले जैसे आकर रहे थे वैसे ही रहेंगे। तुम फिकर मत करो, तुम सिर्फ पढ़ते रहो, मनमनाभव। तुम्हें कर्मातीत बनने का पुरुषार्थ करना है।

गीत:-
तुम्हें पाके हमने....

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) ड्रामा के हर राज़ को जानते हुए किसी भी बात की फिकर नहीं करनी है। पढ़ाई पढ़ते रहना है। मनमनाभव होकर कर्मातीत बनने का ख्याल रखना है। स्वयं को सतोप्रधान बनाना है।

2) हम आत्मायें शिवबाबा की सन्तान आपस में भाई-भाई हैं। शिवबाबा से वर्सा ले रहे हैं। इस खुशी में रहना है।

वरदान:-
अन्तर स्वरूप में स्थित रह अपने वा बाप के गुप्त रूप को प्रत्यक्ष करने वाले सच्चे स्नेही भव

जो बच्चे सदा अन्तर की स्थिति में अथवा अन्तर स्वरूप में स्थित रह अन्तर्मुखी रहते हैं, वे कभी किसी बात में लिप्त नहीं हो सकते। पुरानी दुनिया, सम्बन्ध, सम्पत्ति, पदार्थ जो अल्पकाल और दिखावा मात्र हैं उनसे धोखा नहीं खा सकते। अन्तर स्वरूप की स्थिति में रहने से स्वयं का शक्ति स्वरूप जो गुप्त है वह प्रत्यक्ष हो जाता है और इसी स्वरूप से बाप की प्रत्यक्षता होती है। तो ऐसा श्रेष्ठ कर्तव्य करने वाले ही सच्चे स्नेही हैं।

स्लोगन:-
निश्चय और जन्म सिद्ध अधिकार की शान में रहो तो परेशान नहीं होंगे।

ये अव्यक्त इशारे - सदा हर्षित रहने के लिए अपनी नेचर को सरल बनाओ, सहनशील बनो।

स्वच्छता भी सरलता की निशानी है। जितनी सरलता उतना स्वच्छता होगी इसलिए सभी को अपनी तरफ आकर्षित करेंगे। सच्चाई और सफाई भी तब होगी जब अपने स्वभाव को सरल बनायेंगे। सरल स्वभाव वाला बहुरूपी भी बन सकता है। ऐसे सरल स्वभावी सदा हर्षित रहते और सर्व को आकर्षित करते हैं।